भावांतर भरपाई योजना के तहत 12 हजार किसानों को 32.26 करोड़ रुपये दिए
मुख्यमंत्री ने योजना के लाभार्थियों के साथ गुरुग्राम से किया सीधा संवाद
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था का मूल आधार हैं, इसलिए किसान मजबूर नहीं मजबूत होना चाहिए। किसानों की खुशहाली में ही प्रदेश और राष्ट्र की खुशहाली निहित है। इसी कड़ी में किसानों को जोखिम मुक्त बनाने के लिए सरकार ने भावांतर भरपाई योजना शुरू की। इस योजना के तहत अब तक फल व सब्जी उत्पादक 12 हजार से अधिक किसानों को 33.26 करोड़ रुपये की राशि दी गई है।
यह जानकारी मुख्यमंत्री ने सीएम की विशेष चर्चा कार्यक्रम के तहत गुरुग्राम से ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भावांतर भरपाई योजना के लाभार्थियों से सीधे संवाद के दौरान दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऑनलाइन संवाद कार्यक्रम की शुरुआत से आज तक अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से किसानों से यह आठवीं बार संवाद हो रहा है।
मनोहर लाल ने कहा कि किसान फसल तो पैदा कर लेता है, लेकिन उसके सामने बाजार भावों की अनिश्चितता बनी रहती थी और कई बार तो कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर होते थे। इस समस्या को हमने समझा और तय किया है कि फसल बोने से पहले ही किसानों को यह पता चल जाए कि फसल का कम से कम एक सुनिश्चित मूल्य तो मिलेगा ही। इसके लिए राज्य सरकार ने फल व सब्जियों के लिए जनवरी, 2018 से तथा बाजरे के लिए खरीफ-2021 से भावांतर भरपाई योजना शुरू की है। इसके तहत यदि बाजरे का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चला जाता है तो न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार भाव के अंतर की राशि सरकार द्वारा किसानों को दी जाती है और यह राशि सीधे उनके खातों में डाली जाती है।
उन्होंने कहा कि खरीफ-2021 से पहले सरकार बाजरे की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कर रही थी। लेकिन हमारे पड़ोसी राज्य इसकी खरीद नहीं करते थे। हमें कुछ खबरें मिलीं कि गलत तरीके से व्यापार करने वालों ने पड़ोसी राज्यों से कम दरों पर बाजरे की खरीद की और उसे हरियाणा में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचा। बाजरे को भावांतर भरपाई योजना में शामिल करने से इस समस्या का समाधान हो गया है। एक अन्य समस्या यह थी कि बाजरे का लंबे समय तक भण्डारण नहीं किया जा सकता और यदि 4 से 6 मास में इसका उपयोग न किया जाए तो इसकी गुणवत्ता कम हो जाती है। उद्योगों में बाजरे का उपयोग भी सीमित है। काफी मात्रा में बाजरा मुर्गी फार्मों को बहुत कम भाव पर बेचना पड़ा। इन सबके परिणामस्वरूप राज्य सरकार को इसके निपटान के लिए 825 करोड़ रुपये अतिरिक्त भार वहन करना पड़ा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, मंडल आयुक्त आरसी बिढान आदि मौजूद थे।