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Gurugram News: दो दशक बाद भी दर्जन भर गांवों में नहीं पहुंचा रेनीवेल परियोजना का पानी

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ग्रामीण 1500 से 2000 रुपयों में टैंकर से पानी खरीदकर पीने को मजबूर
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। जिले के लोगों की प्यास बुझाने के लिए वर्ष 2004 में रेनीवेल परियोजना की शुरुआत की गई थी। इस दौरान गांव-गांव में पाइपलाइन डाली गई और वाटर टैंक विभाग की ओर से बनाए गए थे। लेकिन, पुन्हाना उपमंडल के दर्जन भर गांव ऐसे है, जिनमें 20 वर्षो बाद भी पानी नहीं पहुंच पाया है। इन गांवों के लोगों ने कई बार पीने के पानी की मांग करते हुए आवाज उठाई, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने घर-घर में टैंक बनाए हुए है। 1,500 से लेकर 2,000 रुपये में टैंकरों से पानी खरीदकर लोग अपने घर में बनाए टैंक में स्टोर कर लेते हैं।
हालांकि, विभाग की ओर से कुछ गावों में बोर लगाए हुए है, लेकिन पानी खारा होने के कारण ग्रामीण इसका प्रयोग करने से परहेज करते हैं। ग्रामीणों द्वारा इसकी कई बार जांच की मांग उठाई गई, लेकिन सरकार ने इस पर कभी ध्यान नहीं दिया। राजस्थान की सीमा पर बसे गांव विक्टी, फुसैता, हथनगांव, बढा, डूडोली सहित तकरीबन दर्जन भर गावों में दशकों से पेयजल किल्लत बनी हुई है। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से हर वर्ष करोड़ों रुपये पेयजल व्यवस्था को दुरूस्त करने पर खर्च किए जाते है, लेकिन इसका लाभ इन गांवों के लोगों को अभी तक नहीं मिल पाया। पिछड़ेपन का दंश झेल रहे इन गावों की पेयजल व्यवस्था पर कभी भी ना तो जिला प्रशासन ने ध्यान दिया और ना ही सरकार ने।
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ग्रामीणों ने गुस्से में बताते हुए कहा कि उनके गांव में पानी की सप्लाई केवल कागजों तक सीमित है। विभाग की ओर से टैंक बनाए गए, लेकिन पानी नहीं आने के कारण ये टैंक पूरी तरह जर्जर अवस्था में है। जल जीवन मिशन योजना से भी दूर दर्जनों गांव-हर घर जल, हर घर नल का दावा कर प्रदेश सरकार बेशक इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही हो, लेकिन पुन्हाना उपमंडल के गांवों में इस योजना की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है । उपमंडल के दर्जनों गांवों में ग्रामीण एक-एक बूंद पानी को भी तरस रहें है। बेशक इस योजना का काम पूरा हो चुका हो, लेकिन अभी भी ऐसे काफी गांव है जहां पर ना तो पाइपलाइन डाली गई और ना ही कनेक्शन किए गए। जिन गांवों में पाइपलाइन डाली गई है उनमें ठेकेदारों की मिलीभगत से मनमाने कार्यों को अंजाम दिया गया। योजना में भ्रष्टाचार इस कदर फैला की बिल पास करने की एवज में गत वर्ष रिश्वत लेने पर एक जेई भी रंगे हाथ विजिलेंस के हत्थे चढ गया। मुख्य लाइन में अवैध कनेक्शन की भरमार- इन गावों के लिए पुन्हाना से जाने वाली मुख्य लाइन में अवैध कनेक्शन की भरमार है। मुख्य लाइन से अवैध रूप से लिए कनेक्शन से खेतों की सिंचाई तक की जा रही है। सूत्रों की मानें तो विभाग के ही कुछ कर्मचारियों ने मुख्य लाइन से ही कनेक्शन किए हुए है जिसके कारण पीने के पानी की बर्बादी हो रही है

वर्षों पहले गांव में लाइन डालने के साथ-साथ टैंक भी बनाया गया था तो उम्मीद जगी थी की उनके गावं में पानी की किल्लत दूर होगी। लेकिन बनाए गए टैंक में कभी पानी नहीं आया। -इकबाल, ग्रामीण विक्टी फुसैता
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गांव में पीने के पानी की सबसे बड़ी समस्या है। जमीनी पानी खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है। रेनीवेल योजना से गांव को जोड़ा गया था, लेकिन कभी गांव में पानी नहीं आया। सरकार द्वारा इस योजना की जांच कराई जाए तो बडा घोटाला सामने आ सकता है। -भूटृटू, ग्रामीण हथनगांव
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पानी के लिए सरकार ने पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन लोगों को इसका लाभ नहीं मिला। सरकार की हर घर जल योजना में सबसे अधिक भ्रष्टाचार हुआ, लेकिन इसकी जांच तो दूर कभी उच्च अधिकारियों ने ऐसे गांवों को मौका मुआयना तक नहीं किया। -धर्मवीर सैनी, समाजसेवी पुन्हाना

पेयजल योजना के तहत गांव में बना वाटर टैंक पूरी तरह जर्जर है। टैंक में कुछ दिन पानी आया था उसके बाद इसमें कभी पानी नहीं आया। विभाग के अधिकारियों को भी इस बारे में शिकायत की लेकिन विभाग के अधिकारी शिकायतों पर ध्यान नहीं देते। गांव में पानी की किल्लत बनी हुई है। -मुजीबुर्रहमान, ग्रामीण गुलालता
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जिन गांवों में पानी की सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है उनमें विभाग की ओर से बोर लगाए हुए है। गांवों में पानी की सप्लाई सुचारू रूप से चल रही है। मढियाकी बूस्टर से पंप सेट बदलने के बाद इन गावो में रेनीवेल की सप्लाई शुरू करा दी जाएगी। - आबिद हुसैन, एसडीओ जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग

फोटो कैप्शन- गुलालता गांव का वाटर चेंबर जर्जर अवस्था में।
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