समाज की भलाई के लिए कार्य करें लोक सेवक
सेक्टर-44 स्थित अपैरल हाउस में मुख्यमंत्री ने किया नैतिकता शिविर का शुभारंभ
प्रदेश के 3.50 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों को दिया जाएगा नैतिकता का प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-44 स्थित अपैरल हाउस में हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा) ने बुधवार को नैतिकता शिविर का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि जनसेवा की भावना विकसित करने के लिए अब सामान्य कार्मिक प्रशिक्षण के साथ प्रदेश के 3.50 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों को नैतिकता का प्रशिक्षण दिया जाएगा। लोक सेवा से जुड़े सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने-पराये के भेद से ऊपर उठकर समाज की भलाई के लिए कार्य करें।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक संस्मरण का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2013 में प्रधानमंत्री बनने से पहले जब उनसे सबसे बड़ी चुनौती का सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया था कि वह राजनीति और उससे जुड़े लोगों की छवि को बदलने का लक्ष्य लेकर चलेंगे। उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करके भी दिखाया। वर्तमान सरकार पर किसी प्रकार का दाग न होना, इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य यह है कि सरकारी सेवा में आने के उपरांत लोक सेवक के मन में यह संस्कार होना चाहिए कि उन्हें समाज की सेवा की जिम्मेदारी मिली है। साढ़े आठ वर्ष के कार्यकाल में उन्हें इस बात का गर्व है कि समाज की सेवा के माध्यम से प्रदेश को आगे बढ़ाने का कार्य किया।
मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि हरियाणा देश में ऐसा पहला राज्य है जहां से आचरण में नैतिकता व पवित्रता लाने की सोच का कार्यक्रम शुरू हुआ है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी, प्रधान सचिव वी. उमाशंकर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, हिपा की अतिरिक्त निदेशक आशिमा सांगवान मौजूद रही।
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‘समुद्र का भाव बटोरना, बादल का भाव बांटना’
कार्यक्रम में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने गीता के विभिन्न श्लोकों व महाभारत से जुड़े प्रसंगों के साथ लोगों को नैतिकता के विषय में समझाया। उन्होंने समुद्र और बादल का एक उदाहरण देकर बताया कि समुद्र नदियों का जल बटोर लेता है लेकिन उसके एक गिलास पानी से इंसान की प्यास नहीं बुझती। उधर, बारिश में देने का भाव छिपा है, जिसकी वजह से बादलों से बरसने वाली हर बूंद मानवता का कल्याण करती है। कार्यक्रम में रामकृष्ण मिशन के स्वामी सर्वलोकानंद ने कहा कि सुशासन के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही व विश्वसनीयता का होना बेहद आवश्यक है। इसके लिए निस्वार्थ का भाव नैतिकता की आधारशिला है।