उद्योग विहार चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के सदस्यों के साथ संवाद में उद्यमियों ने बताईं समस्याएं
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। उद्योग विहार में जिन सड़कों के निर्माण के लिए 2018 में टेंडर हुए, उनपर आज तक काम नहीं शुरू हो पाया है। ओल्ड दिल्ली रोड से ज्वाला मिल और श्याम चौक के रास्तों पर रोजाना जाम लग जाता है। घंटों आवाजाही में लग जाते हैं। उद्योग विहार फेज-4 के क्वाइन पार्क स्थित चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज ऑफ उद्योग विहार के उद्यमियों ने संवादाता को मजदूरी दर बढ़ने के कारण हुई दिक्कतों समेत इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कई समस्याएं साझा की।
उद्यमियों ने बताया कि नगर निगम सफाई के लिए एक बड़ी रकम लेता है, जो लगभग प्रॉपर्टी टैक्स के बराबर है। मगर उद्योग विहार में सफाई नगण्य है। उद्योग विहार में करीब 3000 इकाइयां हैं जिसमें ऑटोमोटिव, परिधान, कपड़ा और सर्विस सेक्टर की इकाइयां हैं। 1977 से बसे इस औद्योगिक इलाके से बहुत सारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शिफ्ट कर गई है। सर्विस सेक्टर के उद्योग ज्यादा रह गए हैं, सड़कें संकरी हैं, पार्किंग की सुविधा नहीं है, सड़कों पर गाड़ियां खड़ी करनी मजबूरी है।
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मैंने उद्योग विहार की सड़कों के निर्माण, अतिक्रमण और गंदगी को लेकर अधिकारियों को पत्र लिखा है। यहां सफाई व्यवस्था बहुत ही खराब है। - अशोक कुमार कोहली, अध्यक्ष, उद्योग विहार चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
न्यूनतम मजदूरी दर 35 प्रतिशत बढ़ने के कारण करीब 50 प्रतिशत खर्च बढ़ गए हैं। पुराने और स्किल्ड श्रमिक भी वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं। इस वक्त उद्योगों को श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। - अश्विनी कुमार, महासचिव
यहां कई सड़कें खस्ताहाल है, लंबे समय से इनका निर्माण नहीं हुआ है। शाम के वक्त कम से कम 45 मिनट निकलने में लग जाते हैं। उद्योग विहार पर नगर निगम का बिल्कुल ध्यान नहीं है। - अक्षय अग्रवाल, संयुक्त सचिव
उद्योग विहार के उद्यमियों को खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण कई परेशानियां झेलनी पड़ रही है। कई ऐसे हैं जो यहां से शिफ्ट कर गए जबकि यह हरियाणा के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र में से एक है। - राज सिंगला, संरक्षक
इस समय उद्यमी कई तरह की परेशानियां झेल रहे हैं। रोजाना जाम अतिक्रमण, एक कम्युनिटी सेंटर की जगह थी, उसे भी बेच दिया गया। पार्किंग नहीं है, यहां 3000 यूनिट्स हैं, जहां लोग आते हैं। - राजेश शर्मा, उद्यमी
सड़क पर चलना मुश्किल है। सड़क के किनारे काफी कूड़ा पड़ा रहता है। जबकि उद्यमियों से प्रॉपर्टी टैक्स के बराबर कचरा टैक्स नगर निगम ले रहा है। - अशोक बत्रा, उद्यमी