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बादशाहपुर किले से नहीं हटा कब्जा, आज तोड़फोड़

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गुरुग्राम। बादशाहपुर मुगलकालीन किले के परिसर से सोमवार को जिला परिषद कब्जा हटाने की कार्रवाई करेगा। यहां रहने वाले लोगों को रविवार की शाम तक हटने का नोटिस जारी किया गया था, लेकिन लोगों ने नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया।
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एनजीटी ने जिला परिषद को निर्देश दिए थे कि वह 5 अक्तूबर से किले के परिसर को कब्जा मुक्त कराए। इस संबंध में परिषद के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र सारवान ने 28 सितंबर को कब्जा करने वाले लोगों को नोटिस जारी किया था। उन्होंने अतिक्रमणकारियों को 5 अक्तूबर से पहले कब्जा हटाकर भूमि खाली करने का फरमान दिया था। साथ ही उनको चेतावनी दी थी कि कब्जा नहीं हटाने की स्थिति में उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उधर लोगों के कब्जा नहीं छोड़ने की स्थिति में जिला परिषद ने किले को कब्जा मुक्त कराने की पूरी तैयारी कर ली है। परिषद सोमवार को किले में तोड़फोड़ की कार्रवाई करेगा।
‘पक्ष सुने बिना मकान न तोड़ने दे एनजीटी’
बादशाहपुर किला परिसर में बसी कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि मकानों को तोड़ने के आदेश को अमली-जामा पहनाने से पहले एनजीटी को उनका पक्ष भी सुनना चाहिए। इस संबंध में वह सोमवार को एनजीटी में अपना पक्ष रखने जाएंगे। उनका कहना है कि बादशाहपुर किले का क्षेत्र एनजीटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ समाजसेवी तरविंदर सैनी ने रविवार को मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह कॉलोनी करीब 50 साल पहले बसी थी और उनमें रहने वाले लोगों के घरों में बिजली का कनेक्शन लगा हुआ है। इसके अलावा वह नगर निगम को संपत्ति कर भी देते हैं। उन्होंने चूल्हा टैक्स भी दिया हुआ है। वहीं नगर निगम ने कॉलोनी में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रखी हैं, इस कारण यह कॉलोनी वैध है। उधर समाजसेवी विजय यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री सार्वजनिक मंचों से बेघर लोगों को पक्का मकान देने की बात कहते रहते हैं, तो इन लोगों को क्यों उजाड़ा जा रहा है।
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