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कोरोना काल में घर बैठे बढ़ा लोगों का मोटापा

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गुरुग्राम। कोरोना काल में जहां लोगों का शारीरिक श्रम कम हुआ वहीं लोगों ने घर बैठे बोरियत को दूर करने के लिए खाने को ही शौक बना लिया। इसमें अधिकतर जंक फूड का सेवन किया गया। डॉक्टर्स का मानना है लोगों ने घरों में रहते हुए कोरोना से बचाव किया। वहीं दूसरी ओर 40 फीसदी तक मोटापे की बीमारी बढ़ी है। चार मार्च को विश्व मोटापा दिवस है।
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डॉक्टरों ने बताया कि युवा इस बीमारी से बचने के लिए जिम क्लासेज का सहारा ले रहे हैं हालांकि जंक फूड के सेवन से खुद को नहीं रोकते हैं। ऐसे में उन्हें जिम क्लासेज का भी कोई फायदा नहीं मिलता है। इसके साथ ही महिलाओं और दस साल के बच्चों में ही यह मोटापा धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहा है।
बढ़ रहे हैं मोटापे के मरीज
कोलंबिया एशिया अस्पताल के सर्जन डॉ मृगांक शेखर शर्मा ने बताया कि मोटापे की समस्या दिनों दिन बढ़ रही है। ऐसे में लोग सर्जरी का सहारा ले रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान लोगों की जीवन शैली में बड़ा परिवर्तन हुआ। इस दौरान घरों में रह कर लोगों ने खाने पर अधिक ध्यान दिया। इससे संतुलित आहार नहीं मिला और मोटापे की समस्या आई। मोटापे के मरीजों में वृद्धि हो रही है। इसमें अधिकतर ऑफिस कार्य करने वाले लोग शामिल हैं। इसके लिऐ वे बेरिएट्रिक सर्जरी करा रहे हैं।
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मोटापे की वजह से बच्चों में बढ़ रहा मधुमेह
अपोलो क्रेडल अस्पताल की मुख्य सलाहकार डॉ. नेहा गुप्ता ने बताया कि अनियमित जीवन शैली और अस्वस्थ खान पान के कारण बहुत सी महिलाएं मोटापे की शिकार हो रहीं हैं। इससे उनके साथ उनके बच्चों में भी मधुमेह के मामले बढ़ रहे हैं। अधिकतर महिलाएं घरों में ही रहती हैं। शारीरिक श्रम कम होने की वजह से उनका वजन बढ़ रहा है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को इसके लिए सतर्क होने की जरूरत है। उनके मोटापे का बुरा असर बच्चों पर पड़ता है।
एक घंटे एक्सरसाइज और पीना होगा 10 गिलास तक पानी
पारस हॉस्पिटल के लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के मुख्य सलाहकार डॉ. नवीन सतीजा ने बताया कि इस बीमारी को स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर कम किया जा सकता है। इसके लिए उन्हें हर दिन 1 से 2 घंटे एक्सरसाइज करने और दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी पीने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी बच्चों में भी बढ़ रही है। 13 से 15 साल तक के बच्चों में यह अधिक है। ऐसे में उनके अभिभावकों को भी ध्यान देना चाहिए।
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