संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह जिले की सड़कों पर इन दिनों ओवरलोड डंपरों का आतंक साफ देखा जा सकता है। तेज रफ्तार से दौड़ते ये डंपर न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं, बल्कि पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। आलम यह है कि जब भी ओवरलोड डंपरों का काफिला गुजरता है, दुर्घटना के डर से पुलिसकर्मी खुद आगे आने से कतराते हैं।
मुंडाका बार्डर और बीवां बार्डर पर पुलिस तैनात जरूर है लेकिन इनको रोकना तो दूर टोकना भी पसंद नहीं करती है। ये डंपर चालक कई बार पुलिस कर्मचारियों पर हमला करने से भी नहीं चूके हैं। एक बार तो स्थानीय एसडीएम व यातायात पुलिस से भी उलझ चुके हैं। जानकारी के अनुसार, ये ओवरलोड डंपर राजस्थान की सीमा से होकर नूंह जिले में प्रवेश करते हैं। ये डंपर बजरी, पत्थर और अन्य खनिज सामग्री से ओवरलोड होकर हरियाणा और दिल्ली की ओर रवाना होते हैं।
नियमों के अनुसार, निर्धारित भार सीमा से अधिक माल लेकर चलना अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन नूंह जिले में यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित है। स्थानीय आरिफ खान, जमालुद्दीन, सुलेमान सहित दर्जनों नागरिकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और खनन विभाग मिलकर इस पर सख्ती से रोक लगाएं।
दुर्घटनाओं पर एक नजर:
इस साल जिले में हुई 345 दुर्घटनाओं में 211लोगों की मौत हुई है। इनमें से 82 लोग घायल होकर दिव्यांग हो चुके हैं। जब तक इन ओवरलोड डंपरों पर अंकुश नहीं लगेगा तब तक दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना मुश्किल ही रहेगा।
पुलिस की लगातार कार्रवाई चल रही है। जुर्माने से साथ इनको जब्त भी किया जा रहा है। इनकी व्यवस्था में पूरी तरह से जल्द सुधार होगा। -सुखबीर सिंह, थाना प्रभारी यातायात नूंह