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Gurugram News: एक दशक से सेम का दंश झेल रहे दर्जनों गांव

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- 10 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि प्रभावित, लोगों ने लगाया उपेक्षा का आरोप
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- ट्यूबवेल लगाकर समाधान करने की बनाई गई थी योजना, नहीं चढ़ी सिरे

शेरसिंह डागर,
नूंह। नूंह जिले के करीब दो दर्जन गांवों के किसान सेम (क्षारीय लवण) की समस्या से जूझ रहे हैं। जिसके चलते खेताें बिजाई भी नहीं हो पाई है। पिछले एक दशक से सेम की समस्या का दंश झेल रहे किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट है। करीब 10 हजार एकड़ से भी ज्यादा भूमि सेम की चपेट में है। इसको लेकर कई बार प्रशासन से अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। विभाग के रिकार्ड के अनुसार उजीना, बीरसीका , दिहाना, , छपेड़ा , खेड़ा खलीलपुर, इंडरी , भिरावटी राहुका, हिलालपुर, गांगोली, दुबालु सहित कई गांवों में करीब एक दशक से यह समस्या बनी हुई है। सेम बनने का प्रमुख कारण सिंचाई के लिए नहरों में आ रहा रसानयुक्त पानी है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो रसानयुक्त पानी के लगातार प्रयोग करने से जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। सेम उन क्षेत्रों में ज्यादा है जहां पर गुरूग्राम केनाल से सिंचाई होती है या गुरूग्राम केनाल से जो रजवाहे निकलते हैं। कुछ गांवों में सेम की समस्या के निदान के लिए कृषि विभाग की काड़ा विंग ने कई बार प्रस्ताव भी भेेजे। यह प्रस्ताव फाइलों में उलझे रहे। जिसका खामियाजा सैकड़ों किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
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भुखमरी का दंश झेल रहे किसान
सेम के कारण पूरे वर्ष खेतों में पानी भरे रहने कारण समय पर बिजाई नहीं हो पाती। कुछ क्षेत्र में अगर पानी कम होता है तो थोड़ी सी वर्षा में जलभराव होने से पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यह समस्या हर वर्ष किसानों के सामने खड़ी रहती है।
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प्रभावित गांव:

गांव का नाम प्रभावित भूमि एकड़ में
उजीना 400

दिहाना 1200
छपेड़ा 750

खेडा खलीलपुर 550
इंडरी 1500

भिरावटी 600
राहुका -हिलालपुर 700

गांगोली 900
दुबालु 500
किरा 200
संगेल 400
उलेटा। 300
कालियाका। 200




योजना तो बनी, लेकिन नहीं चढ़ी सिरे

जिले के 10 गांव में सेम प्रभावित भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए कृषि विभाग की तरफ से 16 करोड़ लगात से सेम प्रभावित गांवों में ट्यूबवेल लगाने के लिए योजना भेजी गई थी। योजना के मुताबिक इस राशि से सेम प्रभावित गांव में 150 ट्यूबवेल लगने हैं। ट्यूबवेल व पाइप लाइनों से सेम के पानी की निकासी की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है । लेकिन यह प्रक्रिया कागजों में ही उलझी हुई है।
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किसानों की तरफ न तो जनप्रतिनिधियों का ध्यान है न ही अधिकारी सरकार की योजनाओं को लेकर गंभीर हैं। जिससे किसानों का नुकसान हो रहा है। -हेमराज , किसान

समस्या के समाधान के लिए सरकार को चाहिए कि गुरूग्राम केनाल के रसायनयुक्त पानी को साफ करके किसानों के लिए दिया जाए। ताकि किसानों को परेशान न होना पड़े। -एडवोकेट जगदेव पंवार, किसान
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सेम की समस्या कई गांवों में है। कुछ गांवों विभाग से कहकर सेम के पानी की निकासी के लिए ट्यूबवेल लगवाए हैं। कुछ योजनाएं भेजी गई हैं। भाजपा सरकार भी किसानों को लेकर गंभीर नहीं है।
-आफताब अहमद, विधायक नूंह।

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सेम को लेकर कार्य कराए गए हैं। 16 करोड़ से ज्यादा राशि की योजना के कार्य जल्द कराए जा रहे हैं। इसकी प्रक्रिया जारी है। भाजपा ने किसानों के लिए काफी अच्छे कार्य किए हैं। - जाकिर हुसैन, भाजपा नेता।
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