गुरुग्राम/पटौदी। जिले के ग्रामीण इलाकों में बेकाबू हो रहे कोरोना संक्रमितों का इलाज झोलाछाप डाक्टरों के सहारे हैं। गांवों में घर-घर पहुंचकर यही डाक्टर लोगों का इलाज कर रहे हैं। साथ ही खांसी जुकाम और बुखार की दवाएं भी दे रहे हैं, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि उनकी टीमें गांवों में जुटी हुईं हैं। पटौदी, फर्रुखनगर तथा सोहना विकास खंडों के सरपंचों की मानें तो सरकारी टीम नहीं पहुंचती हैं। यहां तक कि टेस्टिंग के लिए भी टीम नहीं पहुंचती हैं। सीएचसी और पीएचसी में पहुंचने पर टेस्ट हो रहा है। जिसकी रिपोर्ट एक सप्ताह में मिलती है। पटौदी और फरुखनगर विकास खंड के कुछ गांवों में में क्षेत्रीय विधायक के कहने पर ही कुछ टीमें जरूर पहुंची हैं।
सरपंचों का यह भी कहना है कि अधिकांश गांवों में खांसी, बुखार, जुकाम और सांस लेने में मरीजों को दिक्कत होती है। लेकिन इलाज की व्यवस्था नहीं है। प्रशासन की ओर से सरपंचों को बोल दिया गया है कि वह पंचायत घर या धर्मशालाओं में आइसोलेशन सेंटर बना दें। आइसोलेशन सेंटरों में ऑक्सीजन के सिलिंडर नहीं हैं। न तो खाना है और न ही बिजली, जेनरेटर का इंतजाम भी नहीं है। ऐसे में रात को गर्मी के समय इन सेंटरों में रहना मुश्किल हो रहा है।
भौड़ा कला गांव में 300 से अधिक पॉजिटिव
20 हजार की आबादी वाले भौड़ा कला गांव में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 300 कोरोना के पॉजिटिव मरीज बताए गए हैं, जबकि ग्रामीणों के अनुसार इस गांव में 500 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बताई जा रही है। गांव के निवासी विश्वजीत सिंह ने बताया कोरोना लगातार इस गांव में बढ़ रहा है प्रशासन की तरफ से कोई खास व्यवस्था नहीं है। अधिकतर युवा कोरोना की परवाह नहीं कर रहे हैं।
पूरा गांव सहयोग करने के लिए तैयार : महेश सैनी
हनुमान प्राचीन मंदिर संस्था के अध्यक्ष महेश सैनी ने कहां कि गांव वालों ने प्राचीन हनुमान मंदिर के अस्पताल को कोविड के लिए जिला प्रशासन को 10 दिन पहले दे दिया था इस अस्पताल में वैसे तो कोई खास व्यवस्था नहीं है। इनका कहना है गांव में कई संक्रमित मरीजों की भी मौतें हुई है जिसकी संख्या पांच से सात है और ग्रामीण डरे हुए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में डोर टू डोर सर्वे आज से
जिला उपायुक्त डॉ. यश गर्ग का कहना है कि संक्रमित मरीजों की पहचान करने के शनिवार से काम शुरू हुआ है। टीमों ने जिला के 50 गांवों में जाकर डोर टू डोर स्क्रीनिंग करते हुए काम किया। इस सर्वे कार्य की लेयर मॉनिटरिंग राज्य, जिला व ब्लाक स्तर पर की जाएगी। ग्रामीण स्तर पर फील्ड में सर्वे करने वाली टीम के सदस्यों में आशा, आंगनवाड़ी वर्कर, स्कूल के अध्यापक, ग्राम सचिव तथा एंटीजन टेस्टिंग सैंपल लेने वाला सदस्य शामिल है। यह टीम घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करेगी व उनसे परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करेगी कि क्या उनके घर में किसी को कोरोना के लक्षण जैसे सिर दर्द, बुखार, सूखी खासी, बदन दर्द आदि है या नहीं। यदि व्यक्ति पॉजिटिव पाया जाता है तो उसके घर में होम आइसोलेशन संबंधी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए जाएंगे अथवा गांव में बनाए गए आइसोलेशन केंद्रों में शिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संक्रमण रोकने के लिए जिन गांवो की आबादी 10 हजार से कम है, उन्हें 10 हजार रुपये। जिनकी जनसंख्या 10 हजार से अधिक है, उन्हें 50 हजार रुपये की ग्रांट दी जाएगी।