नौकरी दिलवाने के नाम पर युवाओं को ठगने वाले फर्जी कॉलसेंटर का खुलासा
गुरुग्राम। गुरुग्राम पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर के जरिये नामी कंपनियों में नौकरी दिलवाने के नाम पर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। साइबर थाना पुलिस की टीम ने मंगलवार को सोहना रोड स्थित कॉरपोरेट बिल्डिंग में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर में छापा मारकर 14 लड़के व लड़कियों को पकड़ा। पुलिस ने इनसे दो लैपटॉप, 10 मोबाइल-सिमकार्ड व डेढ़ लाख नकदी बरामद की है। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने एक साल में देशभर के 500 युवाओं को अपना शिकार बनाया। पकड़े गए आरोपियों में से एक कॉल सेंटर संचालक भी है।
अशोक विहार फेज-3 निवासी राहुल कौशिक ने साइबर थाना पुलिस में शिकायत दी थी कि एक नामी कंपनी में नौकरी दिलवाने के नाम पर उनके साथ ठगी की गई। पुलिस ने युवक की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मंगलवार को पुलिस की तकनीकी टीम मिली सूचना के आधार पर एसीपी (डीएलएफ) करण गोयल के नेतृत्व में साइबर थाना प्रभारी और उनकी टीम ने सोहना रोड स्थित स्पेज आईटेक पार्क बिल्डिंग स्थित अनसदीवी इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में छापा मारा। पुलिस की टीम को देखकर कंपनी में हड़कंप मच गया। पुलिस टीम ने यहां से 8 लड़के व 6 लड़कियों को दबोचा। इनमें से एक कंपनी का संचालक भी था। पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान यूपी मुजफ्फरनगर के उरकाजी गांव निवासी आमिर तुफेल, उत्तराखंड अल्मोड़ा के गांव देविदुरा निवासी मोहित सिंह, फरीदाबाद के सेक्टर-28 निवासी दिनेश शर्मा, रेवाड़ी के फिदेड़ी गांव निवासी लीलू, दिल्ली आया नगर निवासी अमित कुमार, यूपी कानपुर के गांव आरोवरी निवासी पंकज कुमार, यूपी महोबा के गांव इमेलिया निवासी अर्चना श्रीनिवास, पंजाब फाजिल्का के गांव लाधुक निवासी शीनू, पानीपत के गांव गाबलड़ा निवासी वंदना, दिल्ली शकुरपुर निवासी चंचल कुशवाहा, मध्यप्रदेश सतना के गांव रघुराज नगर हेमा विश्वकर्मा, निहाल कॉलोनी निवासी प्रिया, कार्टपुरी गांव निवासी प्रीति व नई दिल्ली के नसीरपुर निवासी अंजली सिंह के रूप में हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी जनवरी से इस गिरोह में काम कर रहे थे। पुलिस जांच में सामने आया कि कंपनी के कई निदेशक है इनमें से आमिर तुफेल नामक शख्स को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस कंपनी निदेशक को रिमांड पर लेकर पूछताछ में जुटी हुई है।
ऐसे बनाते थे शिकार
युवाओं को नौकरी के नाम पर झांसे में लेने के लिए आरोपी नामी जॉब पोर्टल से मिलते-जुलते नाम की वेबसाइट शुरू करते थे। नौकरी के लिए आवेदन करने वालों का डाटा एकत्रित कर कॉल सेंटर से उन युवाओं को फोन कर वेबसाइट पर रिज्यूम अपलोड करने के लिए बोलते। कई नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से बतौर फीस 5 से 20 हजार रुपये यह कहकर लिए जाते कि यह राशि उन्हें रिफंड हो जाएगी। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए अलग-अलग पेमेंट गेटवे में रुपये लेकर इन्हें दो बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए जाते। रुपये लेने के बाद आरोपी युवकों का फोन उठाना बंद कर देते। पुलिस ने आरोपियों से ऐसे ही 10 मोबाइल व 10 सिमकार्ड बरामद किए है।
ज्यादा कमाई के लालच में बनाई दो वेबसाइट
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फरवरी माह में डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट करियरजैपडॉट इन नाम से वेबसाइट बनाकर युवाओं को रिज्यूम अपग्रेड करने और नौकरी दिलवाने के नाम पर ठगी करते थे। अक्तूबर माह में आरोपियों ने पुरानी वेबसाइट बंद कर ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट करियर्स बज डॉट इन व डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट द टाइम्स नाऊ डॉट इन नाम से दो नई वेबसाइट शुरू कर दी।
कंपनी की तरह होती थी ड्यूटी
इस ठगी के पूरे नेटवर्क को एक कंपनी की तरह चलाया जा रहा था। पुलिस को मौके से मिले ड्यूटी रजिस्टर में पाया गया कि यहां कर्मचारी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक रहते थे। यहां कर्मचारियों के लिए हाजिरी के लिए बायोमैट्रिक मशीनें भी लगी हुई मिली, जिनमें कर्मचारियों की हाजिरी दर्ज होती थी।
वर्जन-
आरोपियों से मिले मोबाइल, लैपटॉप और बैंक खातों को पुलिस खंगालने में जुटी हुई हैं। पुलिस पकड़े गए युवक-युवतियों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है, इसमें कई और खुलासे होने की उम्मीद है। - शशांक कुमार सावन, पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय), गुरुग्राम पुलिस