असुरक्षित टावरों को तोड़ने के लिए बिल्डर ने मांगी पुलिस सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के असुरक्षित पांच टावरों को तोड़ने के कार्य में तेजी नहीं आ रही है। इससे प्रभावित लोग चिंतित हैं। उनका कहना है कि अभी उन्हें तय किराया भी नहीं दिया जा रहा है। दूसरी ओर बिल्डर ने पुलिस सुरक्षा मांगी है, जिससे असुरक्षित टावरों से बिजली, पानी व फायर सिस्टम को निकालकर बाहर लगाया जा सके। बिल्डर का कहना है कि कुछ लोग कार्य में रुकावट पैदा कर रहे हैं।
चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी आरडब्ल्यूए के प्रधान राकेश हुड्डा ने बताया कि चिंटेल्स के असुरक्षित टावरों में डी, ई, एफ, जी और एच को तोड़ा जाना है। उन्होंने बताया कि इन टावरों से खिड़की, दरवाजे, पाइप समेत अन्य सामानों को निकाल लिया गया है। हुड्डा का कहना है कि बिल्डर टावरों को तोड़ने में देरी कर रहा है। उनका कहना है कि कार्य में देरी से प्रभावित लोग चितिंत है। उनका कहना है कि बिल्डर को टावरों को तोड़ने का कार्य तेजी से करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आरडब्ल्यूए बिल्डर का पूरा सहयोग कर रहा है।
चिंटेल्स इंडिया के उपाध्यक्ष जेएन यादव ने बताया कि सुरक्षित ए,बी और सी टावर के लोगों के लिए बिजली, पानी और फायर जैसी सुविधाएं देना है। ऐसे में असुरक्षित टावरों को तोड़ने से पहले इन सुविधाओं को बाहर लगाना होगा। यादव ने बताया कि इस कार्य में स्थानीय आरडब्ल्यूए सहयोग नहीं कर रहा है और काम में रूकावट डाल रहा है। इससे टावरों को तोड़ने में देरी हो रही है। टावरों को तोड़ने की अनुमति पहले ही उपायुक्त से मिली हुई है। उपाध्यक्ष का कहना है कि मंडलायुक्त ने टावरों को तोड़ने का समय छह से आठ माह का दिया हुआ है। ऐसे में बिजली,पानी और फायर जैसी सुविधाओं को बाहर किए बिना टावरों को तोड़ना संभव नहीं है। जेपी यादव ने कहा कि प्रशासन से पुलिस सुरक्षा मांगी गई ताकि इन सुविधाओं को असुरक्षित टावरों से निकाला जा सके। उपाध्यक्ष ने बताया कि नोएडा की एडिफिस कंपनी को तोड़ने का ठेका दिया गया है। कंपनी छोटी मशीनों को टावरों के उपर ले जाकर तोड़फोड़ करेगा। बता दें कि बीते वर्ष 10 फरवरी को टावर डी में हुए हादसे में दो महिलाओं की जान चली गई थी। उसके बाद आईआईटी दिल्ली की टीम को टावरों के संरचनात्मक ऑडिट की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद इन टावरों को तोड़ा जा रहा है।