बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने आयोग का लगातार प्रमुख पद खाली रहना दुर्भाग्यपूर्णः हाई कोर्ट
-फरवरी 2026 में दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामे के जरिए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक पूरी करने का आश्वासन दिया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को डीसीपीसीआर के पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने पर दिल्ली सरकार की उदासीनता पर नाराजगी जताई। सरकार ने पहले अप्रैल के मध्य तक काम पूरा करने का आश्वासन दिया था। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि अधिकारी तीन साल से अधिक समय से खाली पड़े आयोग को चालू करने के लिए दिए गए अपने बयानों का भी सम्मान नहीं कर रहे हैं।
पीठ ने सख्त लहजे में कहा, आप (दिल्ली सरकार) अपने ही बयानों का पालन नहीं कर रहे हैं। बच्चों के अधिकारों से जुड़े संवेदनशील मामले में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। दिल्ली बाल संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) पिछले तीन साल से अध्यक्ष और सदस्यों के बिना काम कर रहा है। फरवरी 2026 में दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर आश्वासन दिया था कि अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक पूरी होने की संभावना है। लेकिन बुधवार को सुनवाई के दौरान जब बात सामने आई कि सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है, तो कोर्ट ने गुस्सा जताया। पीठ ने कहा कि यह गंभीर उदासीनता का मामला है। अदालत ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने आयोग का लगातार सिरमौर (प्रमुख पद) खाली रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। पीठ ने सरकारी अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा, हम आपको सिर्फ इसलिए राहत दे दें, ऐसा नहीं होगा। आपको बताना होगा कि आखिर कब तक आयोग काम करेगा?