5000 एकड़ में फैली कोटला झील में रहते हैं देशी-विदेशी पक्षी और जीव
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। मेवात की अरावली पर्वतमालाओं में एक दुर्लभ वन्यजीव ओपोस्सम की मौत ने पर्यावरण प्रेमियों को चिंतित कर दिया है। यह प्रजाति भारत में लुप्त मानी जाती है और वन्यजीव संरक्षण कानून, 1972 के तहत संरक्षित है। मेवात आरटीआई मंच एवं मौजी फाउंडेशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और हरियाणा के वन मंत्री राव नरबीर सिंह को पत्र लिखकर इस घटना की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
एक पर्यावरण प्रेमी ने बताया कि शनिवार को वह अपने बेटे के साथ गांव घागस से जवाहर नवोदय विद्यालय बाई की ओर जा रहे थे, तभी गांव कोटला की बावड़ी से करीब आधा किलोमीटर दूर सड़क पर एक जीव मृत अवस्था में मिला। जब उन्होंने जानकारी ली तो पता चला कि वह ओपोस्सम प्रजाति का जीव है, जो सामान्यतः भारत के पूर्वोत्तर राज्यों-असम, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड में पाया जाता था और अब अत्यंत दुर्लभ है। अरावली की गोद में फैली कोटला झील लगभग 5000 एकड़ क्षेत्र में फैली है। इसमें हर वर्ष देशी और विदेशी पक्षी व जलजीव आते हैं। उन्होंने मांग की कि इस झील और इसके आसपास के क्षेत्र को संरक्षित वन्यजीव एवं वेटलैंड जोन घोषित किया जाए।