पिता ने अपहरण का कराया था मामला दर्ज, अदालत में पुलिस को शिकायत देने की बात से पलटे
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नाबालिग बेटी के अपहरण के एक मामले में पीड़िता और पिता के बयान से मुकरने के बाद अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया। यह आदेश अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश गगन गीत कौर की अदालत ने दिया है।
आठ अक्तूबर 2018 को पिता ने डीएलएफ फेज-एक थाना पुलिस को शिकायत दी थी। उन्होंने शिकायत में बताया था कि 16 वर्षीय बेटी 4 अक्तूबर 2018 को काम पर जाने के बाद वापस नहीं लौटी। पिता ने कुंदन भगत पर शादी का झांसा देकर बेटी को बहलाने का आरोप लगाया था। पीड़िता को 14 अक्तूबर 2018 को उसके पिता ने ढूंढ़ लिया था। अगले दिन 15 अक्तूबर 2018 को पुलिस ने कुंदन को गिरफ्तार कर लिया था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसके पिता दोनों ने अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया।
बयान और जांच में हुआ विरोधाभास
पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी। पिता ने गवाह के तौर पर बताया कि आरोपी का बेटी के लापता होने में कोई हाथ नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि बेटी अपनी मौसी के घर गई थी और 10-12 दिन बाद खुद लौट आई। पिता ने अपनी शिकायत पर भी सवाल उठाए। पीड़िता के पिता ने अपनी शिकायत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। उनके हस्ताक्षर खाली कागजों पर लिए गए थे। जांच अधिकारी भी यह नहीं बता पाए कि पीड़िता को कहां से और किसकी हिरासत से बरामद किया गया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लड़की को उसके पिता ने ही पेश किया था।