गुरुग्राम (पवन कुमार सेठी)। हजारों मील का सफर तय कर 20 हजार से अधिक विदेशी परिंदे सुलतानपुर झील में पहुंच गए हैं। इस साल कोविड संक्रमण की मार के कारण शहरवासी इन परिंदों के दीदार से वंचित हैं। संक्रमण फैलने के डर से सरकार ने इस बार सुलतानपुर स्थित राष्ट्रीय पक्षी उद्यान (सुलतानपुर झील) को खोलने की अनुमति नहीं दी है। यही कारण है कि शहर ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले पर्यटक मुख्य द्वार पर ताला देखकर वापस लौट रहे हैं। वन विभाग ने यहां पोस्टर चस्पा कर सरकार के अगले आदेश तक झील बंद रहने की सूचना दी है।
अधिकारियों ने विदेशी परिंदों के झील में आने से पहले ही उनके लिए तैयारी शुरू कर दी थी। अधिकारियों के मुताबिक, झील का पानी विदेशी मेहमानों को काफी पसंद आता है। जिसके कारण यह सर्दी के मौसम में यहां डेरा डालती हैं। सितंबर से ही विदेशी मेहमानों का आना शुरू हो जाता है। वर्तमान में झील विदेशी मेहमानों से भरी हुई है। इस वक्त 12 से अधिक प्रजातियों के 20 हजार से अधिक पक्षी यहां मौजूद हैं। इनके लिए झील में मछलियों समेत खाने का प्रबंध किया गया है।
नजफगढ़ झील में भी हैं पक्षी
अधिकारियों ने बताया कि झील के आसपास क्षेत्र में भी विदेशी पक्षियों के अनुकूल ही पानी है। इस पानी में खारापन है जो पक्षियों को पसंद आ रहा है। ऐसे में पास ही स्थित नजफगढ़ झील समेत आसपास गांव के जोहड़ में भी करीब 20 हजार विदेशी मेहमान मौजूद हैं। जिन विदेशी पक्षियों को झील का पानी पसंद नहीं आता वह भरतपुर राजस्थान स्थित पक्षी उद्यान का रुख कर लेते हैं।
ये पक्षी हैं मौजूद
वन्य जीव संरक्षक अनिल गंडास ने बताया कि झील में ग्रे लेग गूज, कॉमन टील, कॉमन क्रेन, चील की विभिन्न प्रजातियां, प्वाइंट वुड पेकर, ऑरेंज हेडेड गूज, सिंधी स्पैरो, ब्लैक ड्रोगो समेत अन्य साइबेरियन पक्षी झील में आ चुके हैं। पहली बार कॉमन शेल्डक, रूडी शेल्डक को यहां देखा गया है।
रिसर्च के लिए आती है टीम
हर साल पक्षियों के आने के बाद यहां पर्यटकों के साथ-साथ रिसर्च के लिए टीम भी आती है। टीम यहां आने वाले पक्षियों की प्रजाति, उनके रहन-सहन समेत खानपान पर अपना शोध करते हैं। झील के पानी को भी हर साल शोध करने वाले जांचते हैं। रोजाना आने वाले करीब 2 हजार पर्यटक भी इन शोधकर्ताओं के साथ पक्षियों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी जुटाने का प्रयास करते हैं। इस बार झील बंद होने से पर्यटक गेट पर लगा ताला देखकर वापस लौट रहे हैं।
वर्जन-
सुलतानपुर झील विदेशी परिंदों से भरी हुई है। झील पक्षियों के लिए व्यवस्था की गई है ताकि कोई भी पक्षी भरतपुर के लिए उड़ान न भरे। सरकारी आदेश प्राप्त होते ही झील को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। - एमएस मलिक, मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव), गुरुग्राम