अब 31 मार्च तक ब्याज में 40 फीसदी की दी गई है छूट
अभी तक महज 174 करोड़ रुपये का संपत्ति कर जमा हो पाया है
हर तरह की संपत्तियां के कर से 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक आय का है अनुमान
पिछली बार 1100 करोड़ रुपये था लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नगर निगम शहर में विकास कार्यों के लिए संपत्ति कर एकत्रित करने पर फोकस कर रहा है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से संपत्ति कर दाताओं को बार-बार रियायत दी जा रही है, बावजूद इसके शहरवासी संपत्ति कर जमा नहीं करा रहे हैं। इसका प्रमाण नगर निगम में अभी तक जमा हुआ संपत्ति का आंकड़ा दे रहा है। निगम से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक निगम के खजाने में महज 174 करोड़ रुपये का संपत्ति कर जमा हो पाया है। ऐसे हजारों संपत्ति कर दाता बताए जा रहे हैं, जिन्होंने वर्षों से संपत्ति कर जमा नहीं कराया है। यही कारण है कि स्थानीय निकाय विभाग को ऐसे कर दाताओं को बार-बार रियायत भी दी है। पहले 31 दिसंबर तक ब्याज में शत प्रतिशत छूट दी गई थी। उसके बाद 31 जनवरी तक 50 प्रतिशत छूट का लाभ दिया गया। फिर 28 फरवरी तक 40 प्रतिशत छूट की घोषणा हुई। अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है। यानी जिन कर संपत्ति मालिकों ने 2010-11 से 2021-22 तक संपत्ति कर अदा नहीं किया है, वह 31 मार्च तक अपने बकायों का एकमुश्त भुगतान कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें 40 प्रतिशत ब्याज की छूट का लाभ मिलेगा।
संपत्तियां पांच लाख, जमा हुए 174 करोड़
गुरुग्राम में नगर निगम की ओर से पांच लाख संपत्तियां चिन्हित की हुई हैं। रिहायशी, वाणिज्यिक और औद्योगिक को मिलाकर पिछली बार कुल संपत्तियों से 1100 करोड़ रुपये कर का अनुमान तय किया गया था। अभी तक निगम को 174 करोड़ रुपये की कर के रूप में प्राप्त हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस बार के बजट में 2200 करोड़ रुपये संपत्ति कर से आय का अनुमान लगाया गया है। संपत्ति कर की वसूली के लिए नगर निगम कॉलोनियों और सेक्टरों में विशेष शिविर भी लगा रहा है। यहां तक कि शनिवार-रविवार को नागरिक सुविधा केंद्र खुले रखने की घोषणा भी निगमायुक्त ने कर दी है। बावजूद इसके लोग रुचि नहीं ले रहे हैं।
-
अधिकारियों की मिलीभगत का अंदेशा
घोटालों का गढ़ बने गुरुग्राम नगर निगम में संपत्ति कर जमा कराने में उदासीनता बरतने के मामले में अधिकारियों की मिली भगत का अंदेशा जताया जा रहा है। दबी जुबान में निगम के कुछ कर्मचारी यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि वर्षों से निगम में जड़े जमाकर निगम को कमाई का अड्डा समझने वाले कुछ अधिकारी ही सेटलमेंट के नाम पर वसूली कर रहे हैं और लोगो को संपत्ति कर जमा नहीं कराने के लिए गुमराह कर रहे हैं। ऐसे में निगम के तमाम प्रयास भी सफल नहीं हो पा रहे हैं।
डिफाल्टरों की जानकारी तक नहीं
निगम अधिकारियों के पास संपत्ति कर के डिफॉल्टरों की जानकारी तक नहीं है। कितनी संपत्तियों का कर जमा हुआ है, कितने संपत्ति मालिक कब से कर जमा नहीं कर रहे हैं, इसका रिकॉर्ड भी निगम के पास नहीं है। इस बारे में जब निगम के एक जिम्मेदार अधिकारी से पूछा तो उन्होंने ऐसी जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, इसमें समय लगेगा। पिछले दिनों ही निगमायुक्त ने एक लाख से अधिक के बकायेदारों की सूची तैयार के निर्देश दिए हैं। अब उन्हें सूचीबद्ध कर नोटिस भेजा जाएगा।
-
आंकड़े देने में करते हैं आनाकानी
निगम में इस कदर अंधेरगर्दी है कि निगम के अधिकारी किसी भी प्रकार का आंकड़ा देने में आनाकानी करते हैं। एक अधिकारी से जब वर्षवार जमा हुए संपत्ति कर के आंकड़ों के बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने कई बहाने बनाए और बाद में उच्चाधिकारियों का हवाला देकर आंकड़े देने से मना कर दिया। इससे निगम के अधिकारियों की कार्यशैली और मानसिकता का भी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।