गुरुग्राम। कोरोना लॉकडाउन की मार रामलीला मंचन पर भी पड़ गई है। लॉकडाउन के कारण कई माह तक व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। अनलॉक में भी कारोबार पहले की तरह पटरी पर नहीं आया। रामलीला मंचन कराने वाले कमेटियों में अधिकतर पदाधिकारी व्यापारी हैं और वे स्वयं चंदा देने के साथ-साथ अन्य व्यापारियों एवं दुकानदारों से रामलीला मंचन कराने के लिए चंदा एकत्रित करते थे, लेकिन इस बार वे गत वर्षों की तरह स्वयं चंदा नहीं दे पा रहे हैं और न ही उन्हें अन्य व्यापारियों से चंदा मिल रहा है। लिहाजा रामलीला कमेटियों के समक्ष समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
शहर में करीब दो दर्जन स्थानों पर बड़े स्तर पर रामलीला कमेटियां मंचन कराती हैं। कमेटियों के पदाधिकारी रामलीला मंचन कराने के लिए स्वयं चंदा देते थे। इसके अलावा वे विभिन्न मार्केट में जाकर व्यापारियों एवं दुकानदारों से चंदा मांगते थे, मगर इस बार रामलीला कमेटियों के पदाधिकारियों ने गत वर्षों की तरह ज्यादा चंदा देने में हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने तर्क दिया कि कोरोना लॉकडाउन ने उनकी कमर तोड़ रखी है। कई माह तक उनके व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे, वहीं अब अनलॉक होने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली है। वे अपने प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रहे हैं।
उधर रामलीला कमेटियों के पदाधिकारियों ने गत वर्षों के दौरान चंदा देने वाले वाले व्यापारियों से अच्छा चंदा मिलने की आस में संपर्क साधा, लेकिन उन्हें उनसे भी बात करने के दौरान निराशा हाथ लगी। इन व्यापारियों ने गत वर्षों की अपेक्षा इस बार आधे से भी कम चंदा देने का आश्वासन दिया है। इन दोनों प्रकरण के बाद रामलीला कमेटियों के पदाधिकारियों ने मार्केट में जाकर व्यापारियों एवं दुकानदारों से चंदा नहीं मांगने का निर्णय लिया है।
तीन की बजाय एक ही पुतला जलाएंगी
रामलीला कमेटियों ने चंदा अधिक नहीं मिलने के कारण रामलीला मंचन से संबंधित कुछ खर्चों में कटौती करने का निर्णय लिया है। खास तौर पर रामलीला मंचन दिखाने के लिए बाड़े कम बनाए जाएंगे। इसके अलावा बाड़ों में कुर्सी भी कम लगाई जाएंगी। वहीं दशहरे के दिन झांकी नहीं निकालने का निर्णय किया है। कुछ रामलीला कमेटियां दशहरे के दिन तीन की बजाय एक ही पुतला जलाएंगी, जबकि कई रामलीला कमेटियां एक भी पुतला नहीं जलाएंगी। प्रत्येक रामलीला कमेटी की ओर से विजय दशमी के उपलक्ष्य में रामलीला मंचन कराने पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जाते थे, लेकिन इस बार चंदा कम मिलने की संभावना के मद्देनजर 10 से 12 लाख रुपये ही रामलीला मंचन पर खर्च करने का निर्णय लिया गया है।
हर बार अच्छा चंदा देने वाले व्यापारियों ने इस बार चंदा देने से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इसके अलावा कुछ व्यापारियों ने चंदा देने में कटौती कर दी है। इस कारण उनकी रामलीला कमेटी समेत अन्य रामलीला कमेटियों के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गया है। हालांकि इसके बाद भी वे रामलीला कमेटी मंचन कराएंगी।
- सुरेंद्र खुल्लर, अध्यक्ष, सनातन धर्म सभा, गीता भवन मंदिर
रामलीला कमेटियों ने आर्थिक संकट से निपटने का रास्ता निकालना शुरू कर दिया है। उन्होंने मंचन के दौरान खर्चों में कटौती करने का निर्णय लिया है। खास तौर पर दशहरे के दिन भगवान राम की विजय का जश्न मनाने में कटौती की जाएगी। इसके अलावा दर्शकों के बैठने के बाड़ों में भी कमी की जाएगी।
- कपिल सलूजा, अध्यक्ष, श्री दुर्गा रामलीला कमेटी