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एफएफआरसी कमेटी से अभिभावक अनजान

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एफएफआरसी कमेटी से अभिभावक अनजान
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गुरुग्राम (अंजू सिंह)। स्कूलों में शुल्क से जुड़े मामलों में मनमानी को रोकने के लिए शुल्क और निधि नियामक कमेटी (एफएफआरसी) का गठन किया गया है। यह कमेटी अभिभावकों की मदद करने के लिए बनी है, लेकिन अधिकतर अभिभावक इससे अपरिचित है। इसी कारण स्कूलों की मनमानी को प्रशासन के सामने लाने के लिए या तो प्रदर्शन का सहारा ले रहे हैं या फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर हैं।
अमर उजाला ने अभिभावकों से जब एफएफआरसी कमेटी के संबंध में पूछा तो उन्होंने बताया कि वे इस तरह की किसी कमेटी को नहीं जानते हैं। अभिभावकों का कहना है कि लॉकडाउन के समय कई बार शिकायत करने पर भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया। वहीं कमेटी के सदस्य रहे अभिभावक रामफल श्योराण ने कहा कि नियमानुसार कमेटी को पांच फीसदी स्कूलों का ऑडिट करना होता है, मगर कई वर्षों से ऑडिट नहीं किया जा रहा है। इस वर्ष उनकी ओर से कई शिकायतें कमेटी को भेजी गई। उनका अब तक कोई जवाब नहीं आया है। अगर कमेटी नियमानुसार कार्य करे तो अभिभावकों को कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने होंगे। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि पिछली बार हुई ऑडिट का अब तक कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। साथ ही इस वर्ष के लिए स्कूलों के ऑडिट के लिए ड्रॉ भी नहीं निकाला गया है।
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2014 में बनी थी यह कमेटी
हरियाणा स्कूल शिक्षा नियमावली-2003 के 158-ए और 158-बी के तहत बनी थी। इस कमेटी में गुरुग्राम मंडलायुक्त चेयरमैन होते हैं। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी इसके सदस्य होते हैं। इस कमेटी के माध्यम से सभी स्कूलों के शुल्क की पूरी जानकारी रखनी होती है। प्रति वर्ष पांच फीसदी स्कूलों का ऑडिट किया जाता है।
अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रदर्शन का सहारा
इस कमेटी का सिर्फ नाम सुना है। फीस से संबंधी शिकायतें शिक्षा विभाग में की जाती रही हैं, लेकिन कमेटी के द्वारा कोई प्रतिक्रिया कभी सामने नहीं आई है। अभिभावकों को प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रदर्शन का ही सहारा लेना पड़ता है।
- चौधरी दीपचंद, अभिभावक एकता मंच
फीस के मामले में स्कूलों की मनमानी जारी है। शिक्षा विभाग के जारी निर्देश हमें सोशल मीडिया पर प्राप्त हो जाते हैं। विभाग से कोई मदद नहीं मिल रही है। इस कमेटी के बारे में हम परिचित नहीं हैं।
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- मोहित पंडित
लॉकडाउन में भी पूरा चार्ज मांगा जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी किसी तरह की राहत नहीं हैं। उन्हें कमेटी के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। वे अपने मुद्दे के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
- धर्म किशन
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