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Gurugram News: सुरजीवन भूमि रिजॉर्ट घोटाला सीएम फ्लाइंग टीम ने शुरू की नई जांच

Fri, 24 Oct 2025 11:29 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
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संवाद न्यूज एजेंसी
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तावडू। उपमंडल के बिस्सर अकबरपुर में स्थित सुरजीवन भूमि रिजॉर्ट में कथित भ्रष्टाचार के मामले ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री फ्लाइंग की पांच सदस्यीय टीम रिजॉर्ट पर पहुंची और गहन निरीक्षण के साथ जांच की शुरुआत की। इस घोटाले में फंसे अधिकारियों और भू-माफिया की धड़कनें तेज हो गई हैं, क्योंकि मामला सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है।

जानकारी के अनुसार, सीएम फ्लाइंग की टीम ने रिजॉर्ट पहुंचकर बने हुए भवनों, भूमि के उपयोग और संचालन का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने रिजॉर्ट संचालक देवन श्रीवास्तव से गहन पूछताछ की और संबंधित दस्तावेजों की कॉपियां ली। टीम के सूत्रों ने बताया कि यह जांच उच्च अधिकारियों के निर्देश पर शुरू की गई है। पूर्व में खुफिया विभाग ने इस मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके आधार पर अब सीएम फ्लाइंग ने कमान संभाली है। निरीक्षण के दौरान राजस्व विभाग का एक अधिकारी भी मौजूद था, जिस पर आरोप लगे हैं कि उसने टीम को गुमराह करने का प्रयास किया। पीड़ित पक्ष और रिजॉर्ट संचालक ने पुष्टि की कि टीम ने भवन और भूमि का अलग-अलग मुआयना किया।
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सीएम फ्लाइंग के निरीक्षक राकेश ने कहा कि यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया था। दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर जांच चलेगी। रिपोर्ट तैयार होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। जानकारी के अनुसार मुख्य जांच का फोकस इस बात पर है कि रिजॉर्ट की भूमि को पंजीकरण के समय कृषि भूमि के रूप में दर्ज कराया गया था, जबकि वास्तविकता में यहां व्यावसायिक रिजॉर्ट का संचालन हो रहा है। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
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आरोप है कि तत्कालीन तहसीलदार, हल्का पटवारी और जिला स्तर के कई अधिकारियों ने भू-माफिया के साथ मिलीभगत की। इसके अलावा, कुछ कृषि भूमि की वसीयत को गैरकानूनी तरीके से और नियमों का उल्लंघन करते हुए बदला गया। यह मामला जनवरी 2025 में सुर्खियों में आया था। तावडू उपमंडल की ग्राम पंचायत बिस्सर अकबरपुर में फैले करीब 24 एकड़ भूमि पर 7 एकड़ का पारिवारिक विवाद था। एक पक्ष ने भूमि को भू-माफिया को बेहद सस्ते दामों पर बेच दिया, जिसमें जिला प्रशासन के अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका बताई गई। दूसरे पक्ष ने इसे अदालत में चुनौती दी, जिसके बाद जमीन पर स्टे ऑर्डर मिल गया। पूर्व में एसआईटी का गठन किया गया था, लेकिन वह जांच फाइलों में दबकर रह गई। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है और एक पुलिस केस भी दर्ज है। जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है, लेकिन सीएम फ्लाइंग की रिपोर्ट के बाद सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि सभी दोषी अधिकारियों पर तत्काल एक्शन लिया जाए।
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