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Gurugram News: आनुवंशिक बीमारी का हवाला देकर कंपनी ने खारिज किया था क्लेम

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उपभोक्ता आयोग ने 50 लाख का क्लेम ब्याज के साथ देने का दिया आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पति की मौत हो जाने पर एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से बीमारी न बताने पर रोके गए 50 लाख रुपये का क्लेम अब ब्याज के साथ देना होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है। कंपनी ने पहले मृतक द्वारा प्रीमियम नहीं देने और उन्हें आनुवंशिक बीमारी होने की बात कहकर क्लेम खारिज कर दिया था।
गाडौली खुर्द के इंदिरा आवास कॉलोनी निवासी शीला देवी के पति जीतराम ने 23 अक्तूबर 2018 को एचडीएफसी लाइफ से 23 साल की अवधि के लिए 50 लाख रुपये की सम एश्योर्ड वाली पॉलिसी ली थी। इसके लिए 4,692 रुपये मासिक प्रीमियम निर्धारित किया गया था। 14 मई 2020 को जीतराम गंभीर बीमारी से पीड़ित हुए। उन्होंने इसकी जानकारी ईमेल के माध्यम से बीमा कंपनी को दी। इसके बाद भी उन्होंने अगस्त 2020 तक प्रीमियम का भुगतान किया।
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10 जनवरी 2021 को जीतराम की मौत हो गई। पति की मौत के बाद शीला देवी ने बीमा कंपनी से 50 लाख रुपये के क्लेम की मांग की। कंपनी ने क्लेम देने से इन्कार कर दिया। कंपनी का कहना था कि पॉलिसीधारक ने मृत्यु से पहले प्रीमियम देना बंद कर दिया था। इसके अलावा कंपनी ने दावा किया कि जीतराम को एक्स-लिंक्ड एड्रेस ल्यूकोडिस्ट्रॉफी नामक आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित थे और इस बीमारी की जानकारी पॉलिसी लेते समय छिपाई गई थी। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि गंभीर बीमारी की जानकारी कंपनी को दी गई थी। आयोग ने बीमा कंपनी के तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
प्रीमियम भुगतान को आधार बनाकर खारिज करना उचित नहीं
आयोग ने पॉलिसी के वेवर ऑफ प्रीमियम बेनिफिट प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि गंभीर बीमारी का निदान होने पर भविष्य के प्रीमियम माफ किए जाने का प्रावधान था। ऐसे में पॉलिसीधारक की ओर से बीमारी की जानकारी 14 मई 2020 को दिए जाने के बाद प्रीमियम भुगतान को आधार बनाकर क्लेम खारिज करना उचित नहीं था। आयोग ने यह भी माना कि पॉलिसीधारक को लकवे की शिकायत थी, जिसे स्ट्रोक की श्रेणी में माना गया। स्ट्रोक पॉलिसी में शामिल क्रिटिकल इलनेस की सूची में था। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 50 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से शिकायतकर्ता को दें। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी होने पर 2.5 लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 55 हजार रुपये भी दिए जाएं।
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क्या होती है एक्स-लिंक्ड एड्रेस ल्यूकोडिस्ट्रॉफी बीमारी
यह एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जो शरीर में कुछ बहुत लंबी फैटी एसिड को ठीक से तोड़ने की क्षमता को प्रभावित करती है। इसके कारण दिमाग और नसों के आसपास की सुरक्षात्मक परत (मायलिन) तथा अधिवृक्क ग्रंथियां (एड्रिनल ग्लैंड) प्रभावित हो सकती हैं।
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