4 अगस्त को वापस लौटने के 2 दिन के अंदर पासपोर्ट अदालत में फिर से जमा कराना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम की एक विशेष अदालत ने चिंटेल्स बिल्डर कंपनी के निदेशक अशोक सोलोमन को दुबई यात्रा की अनुमति दी है। अदालत ने शर्त रखी है कि निदेशक को अदालत में दो करोड़ रुपये की एफडीआर जमा करनी होगी। सोलोमन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं और व्यापारिक बैठकों के लिए विदेश जाना चाहते हैं।
अदालत ने आदेश पारित कर अशोक सोलोमन को 29 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक दुबई की यात्रा की अनुमति दी है। उन्हें भारत लौटने के दो दिन के भीतर अपना पासपोर्ट अदालत में फिर से जमा करना होगा। इसके बाद उनकी दो करोड़ रुपये की एफडीआर वापस कर दी जाएगी। सोलोमन चिंटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं। उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर सोभा रियल्टी के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करने के लिए दुबई जाने की अनुमति मांगी।
प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी यात्रा का विरोध किया था। ईडी ने कहा कि सोलोमन पर अवैध भूखंड आवंटन और बिक्री से अपराध की आय अर्जित करने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय ने सोलोमन के दुबई यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाया। ईडी ने कहा कि सोभा रियल्टी के साथ व्यापारिक संबंध के कोई दस्तावेज नहीं दिए गए हैं। हालांकि, अदालत ने पाया कि सोलोमन ने जमानत की शर्तों का कभी दुरुपयोग नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि आपराधिक कार्यवाही लंबित होने के कारण उन्हें व्यापारिक अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि आपराधिक कार्यवाही के कारण उन्हें व्यापारिक नुकसान नहीं होना चाहिए।
सोलोमन को 19 मई 2021 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अंतरिम नियमित जमानत दी थी। जमानत की शर्त के तहत उन्हें अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करना था। उन्होंने पहले भी पासपोर्ट जारी करने और विदेश यात्रा की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने 4 मई 2026 को उन्हें वीजा प्राप्त करने के लिए पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उन्हें यात्रा की अनुमति के लिए निचली अदालत जाने की स्वतंत्रता दी गई थी।