पालम विहार थाना में 10 अगस्त 2020 को दर्ज हुई थी प्राथमिकी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पांच आरोपियों को बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर की अदालत ने सबूतों के अभाव में यह फैसला सुनाया। यह मामला 2020 में दर्ज किया गया था, जब एक व्यक्ति ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। मृतक की पत्नी ने पांच लोगों पर उसे परेशान करने का आरोप लगाया था।
पालम विहार पुलिस ने 10 अगस्त 2020 को मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। शिकायतकर्ता मंजू ने आरोप लगाया था कि उसके पति शमशेर सिंह ने 4 अगस्त 2020 की रात को फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। मंजू ने बताया कि शमशेर ने आत्महत्या से पहले एक ऑडियो रिकॉर्डिंग अपने दोस्त सुरेंद्र को भेजी थी। इस रिकॉर्डिंग में उसने आरोपियों पर उसे परेशान करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। मंजू ने कहा था कि आरोपियों के उत्पीड़न के कारण ही उसके पति ने यह कदम उठाया। इस रिकॉर्डिंग में शमशेर ने आरोपियों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था। आरोपियों में सुनीता, हरकेश उर्फ लड्डू, मुकेश, राजेश और राजकुमार उर्फ राजू शामिल थे। एक अन्य आरोपी विक्रम उर्फ विक्की की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी, जिसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोपियों ने मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाया था। उन्होंने दावा किया कि रिकॉर्ड पर पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद हैं। बचाव पक्ष के वकील ने इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत उकसाने का कोई भी तत्व साबित नहीं हुआ है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज करने में अनावश्यक देरी हुई थी।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की जांच की। न्यायाधीश ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप साबित करने में विफल रहा। इस आधार पर अदालत ने पांचों आरोपियों को बरी कर दिया।