गुरुग्राम। शहर व आसपास के इलाकों में एक कंपाउंडर के साथ मिलकर रेमडेसिविर इंजेक्शनों की कालाबाजारी करने वाले युवक को मुख्यमंत्री उड़नदस्ता व ड्रग्स कंट्रोलर विभाग की संयुक्त टीम ने शनिवार शाम रेवाड़ी की मोबाइल एक दुकान से पकड़ लिया। वहीं, रेवाड़ी के ही एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में कोविड वार्ड में कंपाउंडर का काम करने वाला इसका सहयोगी अभी टीम के हत्थे नहीं चढ़ा है। दोनों आरोपी ग्राहकों को 23 हजार रुपये तक में रेमडेसिविर इंजेक्शनों को बेच रहे थे।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि रेवाड़ी में मोबाइल की दुकान से एक युवक रेमडेसिविर इंजेक्शनों की कालाबाजारी कर रहा है। एक कंपाउंडर उसे इंजेक्शन मुहैया कराता है और ग्राहक तलाश करके उसके पास भेजता है। इस सूचना पर आरोपी कंपांडर से फर्जी ग्राहक बनकर फोन पर संपर्क करने के बाद टीम मौके पर पहुंची। फर्जी ग्राहक बने टीम के सदस्य को दुकान पर भेजा। दुकान पर बैठा आरोपी तिलकराज निवासी गांव चौकी, रेवाड़ी सदस्य को 23 हजार रुपये में रेमडेसिविर इंजेक्शन देने को तैयार हो गया। टीम ने उसे दबोच लिया।
इसकी जानकारी होने पर आरोपी कंपाउंडर राहुल निवासी गांव चौकी, रेवाड़ी फरार हो गया। उड़नदस्ता टीम का कहना है कि राहुल की तलाश की जा रही है। उसके मिलते ही इस कालाबाजार में शामिल अन्य आरोपियों का भी पता चल सकता है। दोनों आरोपियों के खिलाफ रेवाड़ी के थाना मॉडल टाउन में मामला दर्ज कर दिया है।
ऑक्सीजन व रेमडेसिविर की कालाबाजारी नहीं रुक रही
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता, ड्रग्स कंट्रोलर विभाग व गुरुग्राम पुलिस की संयुक्त टीमों के अभियान के बाद भी शहर में ऑक्सीजन गैस के सिलिंडरों व रेमडेसिविर इंजेक्शनों की कालाबाजारी रुक नहीं रही है। इस मामले में एक दर्जन से ज्यादा आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। हालांकि, ज्यादातर आरोपी वीडियो कॉलिंग और वाट्सऐप के माध्यम से इस कालाबाजारी से जुड़े हैं। साथियों के गिरफ्त में आते ही सचेत हो जाते हैं, इसलिए इनकी गिरफ्तारी में पुलिस को मुश्किल आ रही है।