चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में 127.04 करोड़ के कार्याें को मिली मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मुख्यमंत्री नायब सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुई हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी (एचपीडब्ल्यूपीसी) की बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के चार विकास कार्याें को मंजूरी मिली। इसमें बेहरामपुर और धनवापुर सीवर संयंत्र के उन्नयन, द्वारका एक्सप्रेसवे के साथ सीवर शोधित पानी की लाइन डालने और शीतला माता मेडिकल कॉलेज के लिए नॉन मेडिकल उपकरण खरीदना शामिल है। चारों कार्याें पर करीब 127.04 करोड़ खर्च होंगे।
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की ओर से बेहरामपुर में 120 एमएलडी का एसटीपी संचालित किया जा रहा है। अभी संयंत्र से 30 एमएलडी पानी काे दूसरे और तीसरे स्तर तक शोधित किया जाता है। जीएमडीए की योजना है कि बचे 90 एमएलडी पानी की गुणवत्ता को बेहतर किया जाए।
जीएमडीए बेहरामपुर के 120 एमएलडी संयंत्र के उन्नयन, जिसमें 90 एमएलडी क्षमता वाले तृतीयक उपचार संयंत्र की डिजाइनिंग, निर्माण, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग कराने जा रहा है। इस पर करीब 33.88 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
धनवापुर में मौजूदा 100 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेडेशन होगा। एसटीपी की डिजाइनिंग, निर्माण, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण, ओवर फ्लो सम्प, पाइप, डिफ्यूज़र, ब्लोअर, पंप, 2 बायो गैस इंजन और बायो गैस स्क्रबर इकाई की मरम्मत और रखरखाव कार्य होगा।
साथ ही 75 एमएलडी क्षमता वाले तृतीयक उपचार संयंत्र की डिजाइनिंग, निर्माण, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग समेत अन्य कार्य शामिल हैं। इस पर करीब 51.30 करोड़ खर्च होंगे। इसके अलावा द्वारका एक्सप्रेसवे के साथ विभिन्न स्थानों पर रीसाइकिल पाइप लाइन को स्थानांतरित करना, हरसरू चौक को पार करने के लिए ट्रेंचलेस के माध्यम से 1500 एमएम, 1600 एमएम और 1800 एमएम की पाइपलाइन डाली जानी है। इस पर करीब 14.91 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
सेक्टर 102 में निर्माणाधीन शीतला माता मेडिकल कॉलेज में सामान लेने संबंधी टेंडर लगाया था। इसमें नॉन मेडिकल उपकरण लिए जाएंगे। इस कार्य पर 26.95 करोड़ खर्च होंगे। इसके अंतर्गत ऑक्सीजन प्लांट, ओटी, स्टेलाइज यूनिट स्थापित की जाएगी। साथ ही अन्य गैर चिकित्सीय उपकरण खरीदे जाएंगे। चारों योजनाओं को शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुई बैठक मंजूरी दी गई है। बैठक में जीएमडीए के सीईओ श्यामल मिश्रा समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए।
शोधित पानी की गुणवत्ता बेहतर करने पर जोर
जीएमडीए ग्राउंड वाटर के दोहन को काम करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत सीवर के शोधित पानी के प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत एसटीपी के पानी को शोधित कर इंडस्ट्री को उपलब्ध कराने के साथ निर्माण कार्य के लिए दिया जा रहा है। जीएमडीए की योजना है कि एसटीपी के पानी की गुणवत्ता सुधरने से इसका प्रयोग अन्य कार्यों में करने में आसानी होगी। दूसरी ओर, यदि पानी ड्रेनेज में छोड़ा जाएगा तो यमुना दूषित नहीं होंगी। इसके अलावा जीएमडीए शहर में सीवर शोधित पानी बागवानी में प्रयोग करेगा। इसे लेकर ओल्ड गुरुग्राम में तीन-चार टैंक बनवाने की योजना है। जीएमडीए शहर में सीवर के गंदे पानी को शोधित करने के लिए जरूरत के अनुसार सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) लगवा रहा है। पुराने शहर के सीवर के पानी को शोधित करने के लिए धनवापुर और बेहराम गांव में एसटीपी लगे हुए हैं।