ग्रामीणों ने शासन व प्रशासन से मुआवजे की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखनगर। खंड के गांव तिरपड़ी में नहर ओवरफ्लो होने से करीब 10 एकड़ की धान व बाजरे की फसल जलमग्न हो गई। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने शासन व प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। ग्रामीण मनोज, दीपक, विजयपाल, महावीर, राजबीर, सोनी प्रधान, त्रिलोक और सोमबीर आदि का आरोप है कि नहरी विभाग द्वारा गर्मियों में तो इस नहर में बिल्कुल पानी नहीं छोड़ा जाता। बरसात का मौसम है तो पानी का डायवर्ट करके इस नहर में छोड़ दिया जबकि इस नहर को गांव तिरपड़ी व बसुंडा की सीमा में लास्ट प्वाइंट दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे नहर में पानी ज्यादा हो गया और ओवरफ्लो होकर साइड से मिट्टी कट गई। मिट्टी कटाव की वजह से नहर टूट गई और सारा पानी पास के खेतों में भर गया। इसमें किसानों की धान व बाजरे की फ़सल खड़ी थी वह जलमग्न हो गई। ऐसे में धान की फसल तो बिल्कुल डूब गई। उनका आरोप है कि नहरी विभाग को नहर में बढ़ते जलस्तर से अवगत कराया था कि बरसात का मौसम है नहर में ज्यादा पानी न छोड़े वरना ओवरफ्लो हो नहर टूटने का डर है जिससे फसल डूब जाएगी बावजूद इसके नहर में पानी कम नहीं किया गया जिससे नहर ओवरफ्लो होकर टूट गई और फसल पानी में डूब गई। उन्होंने कहा कि हमारी पंचायत भूमि जो किसानों ने ले रखी है उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है। अधिकारी कहते हैं कि पोर्टल बंद है हमारी सरकार से अपील है कि पोर्टल खोला जाए जिससे किसानों की फसल का रजिस्ट्रेशन हो सके।
क्या कहते हैं सरपंच
जलमग्न हुई किसानों की फसल पर सरपंच अजीत सिंह ने कहा कि नहरी विभाग की लापरवाही के चलते किसानों की फसल खराब हुई है। जब मुझे पता चला कि नहर ओवरफ्लो हो रही है और कटाव हो रहा है तो मैंने खुद नहरी विभाग के जेई से फोन पर समस्या से अवगत कराया और पानी कम करने को कहा। पानी तो कम हुआ लेकिन मिट्टी के कटाव से नहर टूट गई और किसानों की करीब 10 एकड़ में खड़ी धान व बाजरे की फसल जलमग्न हो गई। शासन प्रशासन को किसानों के नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। वहीं नहरी विभाग के जेई का कहना है कि 7 से 10 दिन के अंदर टूटी हुई नहर की मरम्मत करवा दी जाएगी और अभी तुरंत प्रभाव से नहर का पानी रोक दिया गया है।