अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस-
1827 से अब तक के फोटोग्राफी इतिहास को संजोए है म्यूजियो कैमरा
नंबर गेम- 03 हजार दुर्लभ विंटेज कैमरे रखे गए हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। जहां देश-दुनिया में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के अनेक संग्रहालय हैं। वहीं, डीएलएफ फेज-4 में स्थित म्यूजियो कैमरा दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा फोटोग्राफी संग्रहालय है।लगभग 18,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला यह भव्य फोटोग्राफिक आर्ट सेंटर ऐतिहासिक कैमरों और लेंसों के दुनिया के सबसे अनूठे संग्रहों में से एक है। यहां लोगों को तस्वीरों के सफर की कहानी सुनने व देखने को मिलती है।
इस संग्रहालय की शुरुआत साल 2019 में प्रसिद्ध फोटोग्राफर आदित्य आर्य के निजी संग्रह के साथ की थी। बाद में इसे इंडिया फोटो आर्काइव फाउंडेशन और नगर निगम गुरुग्राम के बीच पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत एक बड़े स्तर पर विकसित किया गया। यहां सन 1827 से लेकर अब तक के फोटोग्राफी के इतिहास को दर्शाया गया है। इस गैलरी में दुनिया के सबसे पहले कैमरे के मॉडल से लेकर अत्याधुनिक जासूसी कैमरे, शुरुआती दौर के फ्लैश उपकरण, बॉक्स कैमरे और करीब तीन हजार दुर्लभ विंटेज कैमरे रखे गए हैं।
संग्रहालय के निदेशक आदित्य आर्य के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर प्राचीन कैमरों और ऐतिहासिक उपकरणों को सुरक्षित रखना बेहद खर्चीला और चुनौतीपूर्ण काम है। इन प्राचीन कैमरों और संवेदनशील फिल्मों को हवा की नमी से बचाने के लिए संग्रहालय में चौबीसों घंटे एयर कंडीशनर चालू रखने पड़ते हैं, जिससे हर महीने बिजली का बिल लाखों रुपये आता है। इस पूरे परिसर को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर महीने लाखों रुपये के बजट की आवश्यकता होती है। यहां प्रति टिकट की कीमत 200 रुपये है।
संग्रहालय केवल कैमरों तक सीमित नहीं है बल्कि यहां इतिहास और साहित्य प्रेमियों के लिए एक ओपन लाइब्रेरी भी बनाई गई है। यह लाइब्रेरी पूरी तरह निशुल्क है और सभी लोगों के लिए खुली रहती है। यहां खुले वातावरण में बेंच पर बैठकर किताबें पढ़ने की सुविधा उपलब्ध है।