गुरुग्राम। ब्लैक फंगस इन्फेक्शन (म्यूकरमाइकोसिस) को लेकर चारों तरफ भले ही काफी चर्चाएं चल रही हों, लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर निजी स्तर पर कोई भी कदम उठाने का मन नहीं बना पा रहा है। विभाग के मुताबिक इस बारे में सरकार के निर्देशानुसार ही जिला स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जिले के निजी अस्पतालों में म्यूकरमाइकोसिस के मरीज आने शुरू हो गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि सभी अस्पतालों को ब्लैक फंगस इन्फेक्शन से संबंधित मरीजों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के साथ साझा करने का निर्देश दे दिया गया है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में अब तक एक भी म्यूकरमाइकोसिस का मरीज दर्ज नहीं हुआ है। ऐसे मरीजों के इलाज के लिए अलग सेंटर बनाने के सरकार की तरफ से जो निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग भले ही जानकारी से अनभिज्ञ हो लेकिन जिले के निजी अस्पतालों में इसके अब तक करीब एक दर्जन मरीज पहुंच चुके हैं। अकेले फोर्टिस अस्पताल में ही इससे पीड़ित 10 मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं।
नागरिक अस्पताल में इलाज की है व्यवस्था
सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल प्रबंधन इसके इलाज की पूरी व्यवस्था होने की बात कह रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष राठी ने बताया कि इससे संबंधित सभी दवाएं नागरिक अस्पताल में उपलब्ध हैं। ऐसे मरीजों के इलाज में एंटी वायरल दवाएं चलाई जाती हैं और इसकी अस्पताल में उपलब्धता है।
ये हैं लक्षण
फोर्टिस अस्पताल के हिमेटोलॉजी विभाग के मुख्य निदेशक डॉ. राहुल भार्गव के मुताबिक म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षणों में नाक बंद होना, नाक से खून के धब्बे आना, देखने में धुंधलापन, लगातार तेज सिर दर्द, आंखों व नाक पर सूजन, उल्टी, बुखार, छाती में दर्द शामिल हैं। इन लक्षणों वाले मरीजों को तत्काल डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक ब्लैक फंगस गंभीर संक्रमण है, जो खासतौर पर जमीन के नीचे व लकड़ी, कंपोस्ट खाद समेत अन्य सड़ने वाली वस्तुओं में पाया जाता है। सबसे खास बात यह है कि कोरोना वायरस की तरह ही सांस के जरिए ये इन्फेक्शन शरीर में प्रवेश करता है। लंबे समय से शरीर में हुआ घाव भी इसके प्रसार की वजह बन सकता है।