कैबिनेट मंजूरी के बाद लंबित 40 मामलों पर होगी सुनवाई, भरेगा राजस्व का खजाना
पारदर्शिता के चक्कर में तीन साल से लटका था मामला
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। साइबर सिटी में गगनचुंबी इमारतों में रहने वालों के रास्ते जल्द ही आसान होंगे। कैबिनेट की ओर से मंजूरी के बाद 40 बिल्डरों की नगर निगम की जमीन खरीदने की राह आसान हाेगी। आवेदन करने वालों में ज्यादातर मामले ऐसे हैं, जहां पर बिल्डरों ने चारों ओर से जमीन ले रखी है और बीच में गांव राजस्व का रास्ता बंद पड़ा हुआ था।
हरियाणा सरकार की नई नीति के तहत जमीन खरीदने के लिए चार गुना रेट देना होगा। इससे संबंधित निकायों और पंचायतों को आय होगी। नई पालिसी को लेकर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। इसके लिए शर्त यह होगी कि भूमि का मूल्यांकन भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 के तहत तय किए गए कलेक्टर रेट या पिछले दो सालों की सबसे ऊंची नीलामी दर (इनमें से जो भी ज्यादा हो) के आधार पर किया जाएगा।
इस पालिसी के लागू होने के बाद अब रेवन्यू रास्तों का झंझट खत्म हो जाएगा। खासतौर पर अकेले गुरुग्राम में ही 100 से ज्यादा ऐसे केस हैं, जिनमें बिल्डरों ने रेवन्यू रास्तों पर प्लाट काट रखे हैं तो कहीं सोसाइटी बनाकर सरकारी रास्तों पर कब्जा कर लिया है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। कई सोसाइटियों के बांशिंदों के लिए रास्ता ही नहीं बचा है।
सपने दिखाकर बेचे फ्लैट, बीच से निकल रहे रास्ते
बिल्डरों ने बड़े सपने दिखाकर फ्लैट तो बेच दिए, लेकिन कई सोसाइटियों के बीच से निकल रहे रास्तों के कारण यह निवासियों के लिए सुरक्षा की दृष्टि से मुसीबत बने हुए हैं। दिनभर इन रास्तों से बाहर के लोगों की आवाजाही रहती है। अब बिल्डर इन रास्तों को संबंधित पंचायत या निगम से खरीद सकेंगे।
गुरुग्राम में सौ से ज्यादा केस, 40 बिल्डरों ने किया आवेदन
गुरुग्राम। रेवन्यू रास्तों पर कब्जों के 100 से ज्यादा केस हैं। नगर निगम में जमीन को खरीदने के लिए 40 बिल्डरों ने आवेदन किया है। यह प्रस्ताव नगर निगम शहरी स्थानीय निकाय विभाग मुख्यालय को भेजेगा इसके बाद मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद इन रास्तों की जमीन को बेचा जा सकेगा। इसके साथ ही बिल्डर य निजी संस्था को प्रस्ताव रखने समय कुल राशि का 25 प्रतिशत अग्रिम तौर पर संबंधित विभाग जमा कराना होगा।
नगर निगम की जमीन के पॉकेट को लेकर 40 बिल्डरों की ओर से आवेदन लंबित है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद एक ओर बिल्डरों की समस्या हल होगी वहीं दूसरी ओर राजस्व का खजाना भरेगा।
- संजीव मान, चीफ टाउन कंट्री प्लानर, नगर निगम गुरुग्राम