ई और एफ के फ्लैट मालिकों को बिल्डर का समझौता पत्र नामंजूर
- संशोधित समझौता पत्र प्रशासन को भेजा
- प्रशासन ने बिल्डर को भेजकर दो दिन में जवाब मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर 109 स्थित चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी की टावर ई और एफ के फ्लैट मालिकों ने फ्लैट खाली करने को बिल्डर के द्वारा प्रस्तुत की गई योजना को नामंजूर कर दिया है। साथ ही संशोधित समझौता पत्र प्रशासन को प्रस्तुत किया है। जिला प्रशासन ने इसे बिल्डर को सौंपते हुए दो दिन में जवाब मांगा है। दोनों टावर के निवासियों ने 12 सूत्रीय संशोधन पत्र प्रशासन को सौंपा है।
इसमें कहा गया है कि बिल्डर के पेश कि गए पत्र में पेज नंबर-2 पर लिखे शब्द आवंटी की जगह मालिक किया जाए। इसके साथ ही डिफॉल्ट क्लॉज को भी जोड़ा जाए। इसमें प्रावधान होगा कि दूसरी पार्टी द्वारा भुगतान करने में कोई भी चूक होने पर समझौता रद हो जाएगा और किया गया भुगतान पहली पार्टी के पक्ष में जब्त हो जाएगा। दूसरे पक्ष का इस पर कोई दावा नहीं होगा।
इसके अलावा शब्द , किसी बी अप्रत्याशित कारणों के अधीन को हटा दिया जाना चाहिए। चूंकि अन्य टावरों को पहले ही असुरक्षित घोषित किया है तो समझौते में अप्रत्याशित कारणों को शामिल करने की कोई वजह नहीं है। स्टांप शुल्क की वास्तविक राशि शब्द को पंजीकरण शुल्क शब्द से बदला जाए। रजिस्ट्री की लागत में दोनों ही प्रक्रिया शामिल हैं। जहां भी निपटान राशि या पूर्ण निपटान राशि शब्द का उल्लेख किया गया है, वहां इसका मतलब होगा कि फ्लैट आकार का सुपर एरिया। इसके साथ रजिस्ट्री लागत (इसमें स्टांप शुल्क, पंजीकरण शुल्क, इंटीरियर शामिल होगा) के साथ कुल राशि का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए।
पहली किस्त 10 फीसदी के भुगतान पर चाबी सौंपने पर जोर दिया है। यदि 10 फीसदी अग्रिम राशि के साथ कुल ऋण राशि का भुगतान किया जाता है, तो एनओसी और मूल दस्तावेज मालिक को सौंपे जाने चाहिए न कि बिल्डर को। मालिक स्वयं अंतिम भुगतान और बिक्री को रद्द करने के समय एनओसी और मूल दस्तावेजों का आदान-प्रदान करेगा। इसी प्रकार के अन्य प्रावधान और शब्द संशोधन भी पत्र में भेजे गए हैं। पिछले दिनों निवासियों की एडीसी के साथ बैठक हुई थी उसमें ही प्रावधान रखे गए थे। संशोधित समझौता पत्र प्रशासन ने बिल्डर को भेज दिया है। ई और एफ टावर में करीब 20 फ्लैट मालिक रह रहे हैं। करीब-करीब सभी अपना पैसा वापस लेकर फ्लैट छोड़ने को तैयार है। कुछ प्रावधानों पर बात अटकी पड़ी है।