50 की उम्र के बाद कमजोर होने लगती हैं हड्डियां
गुरुग्राम। 50 साल से ज्यादा उम्र के साथ लोगों में आस्टियोपोरोसिस (हड्डियों के कमजोर होने की समस्या) की बीमारी बढ़ने लगती है। ऐसे में लोगों को हड्डियों के कमजोर होने की इस बीमारी के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग आते हैं, जो आस्टियोपोरोसिस से पीड़ित होते हैं।
सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डॉ. मनीष राठी का कहना है कि आम तौर पर लोगों में 40 साल की उम्र से हड्डियों के कमजोर होने की समस्या आने लगती है। 50 साल के बाद यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में आवश्यक है कि लोग ज्यादा विटामिन डी लें। इसके लिए धूप में बैठना भी एक बेहतर विकल्प है।
आस्टियोपोरोसिस की समस्या बढ़ने पर व्यक्ति को कई बार हड्डियों के कमजोर होने का अहसास भी नहीं होता। वे खड़े होते ही या फिर कुछ दूर चलने पर अचानक गिर जाते हैं। यह समस्या आम तौर पर बुजुर्गों में ज्यादा दिखती है। वे कई बार बाथरूम में गिर जाते हैं। इसकी मुख्य वजह आस्टियोपोरोसिस ही होती है। ऐसे में 50 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
हड्डियां टूूटने का भी रहता है खतरा
नारायणा अस्पताल के आर्थोपेडिक्स व स्पाइन सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों के कमजोर होने तक ही सीमित नहीं रहता। इससे बिना कोई गंभीर चोट लगे फ्रैक्चर होने, गंभीर रूप से हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है। 60-65 साल से अधिक उम्र के बाद करीब 90 फीसदी मरीज ऑस्टियोपोरोसिस से संबंधित समस्याएं लेकर आते हैं। भले इससे बुजुर्गों को अधिक जोखिम होता है, लेकिन युवा भी इससे पीड़ित हो सकते हैं। इसकी मुख्य वजह दवाओं के साइड इफेक्ट या थायराइड जैसी बीमारी हो सकती है।
कैल्शियम और विटामिन-डी से होगा बचाव
हड्डियों की कोशिकाओं के निर्माण और विकास में पोषक तत्वों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में कैल्शियम व विटामिन डी को भरपूर मात्रा में लेना चाहिए। धूम्रपान, शराब व अन्य तरह के नशे की लत से दूर रहना चाहिए। हड्डियों के स्वास्थ्य में व्यायाम और सक्रिय दिनचर्या का बहुत योगदान होता है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा व्यायाम, शारीरिक गतिविधियों में रुचि लेने व सही तरह बैठने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।