गुरुग्राम। प्रदेश भाजपा ने कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के विरोध से केंद्र एवं राज्य सरकार को बचाने की रणनीति तय की है। इस मामले में दोहरे तौर पर कार्य किया जाएगा। एक ओर एसवाईएल नहर का मुद्दा उठाकर कांग्रेस एवं पंजाब की सरकार को घेरेंगे, तो दूसरी ओर किसानों के साथ मार्च निकाल और सभा कर उनको समझाया जाएगा। सोमवार को जीआई हाउस में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में यह रणनीति तय की गई।
बैठक में प्रदेश के सभी लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद, राज्य के सभी मंत्री, विधायक एवं विधानसभा का गत चुनाव हारे उम्मीदवार और प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान तय किया कि केंद्र सरकार से वाईएसएल नहर का निर्माण करने की मांग किसान आंदोलन की मांग पूरी करने में जोड़ी जाए, क्योंकि इस नहर का निर्माण नहीं होने से हरियाणा के किसानों को सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब इस नहर का निर्माण नहीं करने दे रहा है जबकि सुप्रीम कोर्ट नहर का निर्माण करने का आदेश दे चुका है। इस मुद्दे पर प्रदेश भाजपा के नेताओं ने केंद्रीय गृहमंत्री से मिलने का निर्णय लिया और बैठक के बाद उनसे मिलने दिल्ली चले गए। वहीं कृषि कानून के समर्थन में अभियान शुरू करने एवं किसानों को समझाने का निर्णय लिया। इस कड़ी में भाजपाई किसानों को साथ लेकर मार्च करेंगे। वहीं सभाओं का आयोजन किया जाएगा। जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय नेता संबोधित करेंगे। बैठक में प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत, कृष्णपाल गुर्जर आदि मौजूद रहे।