मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रयोग, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद अपनाने पर विशेषज्ञों ने दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
मानेसर। शिकोहपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मिट्टी की सेहत और सही तरीके से खाद इस्तेमाल करने के बारे में किसानों ने जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे फसलों की पैदावार बढ़ाई जा सकती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। डॉ. हरेंद्र सिंह दहिया ने नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि अंधाधुंध रासायनिक खादों का प्रयोग मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाता है।
इस अवसर पर केंद्र के अध्यक्ष डॉ. बिजय कुमार नंदा ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार, उर्वरकों के इस्तेमाल की सलाह दी और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों से अन्य लोगों को भी मिट्टी की जांच कराने के लिए प्रेरित करने को कहा।
वहीं, डॉ. भरत सिंह ने वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन तकनीक की जानकारी देते हुए गोबर से तैयार सड़ी हुई खाद और वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही, जिससे मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाया जा सके। इस कार्यक्रम में शिकोहपुर, नौरंगपुर, सकतपुर और रामपुरा गांवों के किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।