- जमानती वारंट का निष्पादन नहीं होने पर डीसीपी हेडक्वार्टर को अदालत में पेश होकर देना होगा स्पष्टीकरण
-शिकायतकर्ता ने 2017 में की अदालत में याचिका दायर, प्राधिकरण को करीब 60 लाख रुपये का देना है मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगदीप सिंह की अदालत ने मुआवजा नहीं देने के मामले में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चीफ कंट्रोलर ऑफ फाइनेंस (सीसीएफ) और चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। जिला अदालत ने दूसरी बार जमानती वारंट जारी किया है। एक बार पहले वारंट जारी होने पर सीसीएफ और चीफ एडमिनिस्ट्रेटर की तरफ से अदालत में कोई पेश नहीं हुआ था। अब इस मामले में 18 अप्रैल को सुनवाई होगी।
शिकायतकर्ता निधि की तरफ से पेश हुए बार काउंसिल पंजाब एंड हरियाणा के पूर्व चेयरमैन राम अवतार गुप्ता ने बताया कि शिकायतकर्ता की जमीन को एचएसवीपी ने अधिग्रहण मेट्रो के लिए किया था। मुआवजा नहीं मिला तो पीड़ित ने साल 2017 में अदालत में याचिका दायर की। अदालत ने पैसे देने का आदेश दिया, लेकिन अभी तक शिकायतकर्ता को पैसे नहीं दिए गए। पिछले साल नवंबर को अदालत ने शिकायतकर्ता के पक्ष में पैसे देने का आदेश दिया था। अदालत में दलील दी गई थी कि यह मामला चीफ कंट्रोल फाइनेंस के पास लंबित है। इस पर अदालत ने सीसीएफ और चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के विरुद्ध जमानती वारंट जारी कर दिया गया। इसके साथ ही अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अधिकारियों के विरुद्ध जमानती वारंट का निष्पादन डीसीपी मुख्यालय सुनिश्चित करें। ऐसा नहीं होने पर डीसीपी मुख्यालय अदालत में पेश होकर वारंट के निष्पादन न करने के कारणों के बारे में बताएं। आदेश की अनुपालना होने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।