वर्ष 2018 में 32 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई इमारत आज जर्जर हालत में पहुंची
ग्रामीण बोले-अस्पताल में डॉक्टर कई महीने ड्यूटी पर नहीं आते
संवाद न्यूज एजेंसी
पिनगवां। खंड के बड़ेड़ गांव का पशु अस्पताल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। साल 2018 में करीब 32 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई यह इमारत आज जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते अस्पताल की दीवारें दरक चुकी हैं, छत से प्लास्टर झड़ चुका है और परिसर में झाड़ियां उग आई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर कई महीने ड्यूटी पर नहीं आते, जिससे पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें निजी पशु चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है, जहां महंगे दामों पर दवाएं और इलाज करवाना उनकी मजबूरी बन गया है।
गांव के पशुपालक सलीम, इरफान और नसीर अहमद का कहना है कि अस्पताल बनने के शुरुआती दिनों में यहां व्यवस्था ठीक थी, लेकिन अब यह पूरी तरह उपेक्षा का शिकार है। कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी जा चुकी है, मगर किसी ने सुध नहीं ली।
अस्पताल की जर्जर इमारत अब शरारती तत्वों का अड्डा बन चुकी है। रात के समय यहां अराजक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे आसपास के लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से जल्द अस्पताल की मरम्मत कराने और डॉक्टर की नियमित तैनाती की मांग की है, ताकि पशुपालकों को राहत मिल सके।
जर्जर इमारत की मरम्मत के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। ग्रामीणों से भी अपील है कि पशु अस्पताल की देखरेख कर डॉक्टर का सहयोग करें।
-वीरेंद्र सेहरावत, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग