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विवादों के त्वरित समाधान के लिए हरेरा में बना मध्यस्थता फोरम

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गुरुग्राम। हरियाणा भू संपदा विनियामक प्राधिकरण (हरेरा) ने प्रमोटर्स व निवेशकों के बीच विवादों के त्वरित समाधान के लिए संपूर्ण मध्यस्थता फोरम की स्थापना की है। इसके जरिये विवादों का प्राथमिक स्तर पर ही निपटारा करने की कोशिश रहेगी। हरेरा में मध्यस्थता फोरम बनाने की काफी समय पहले से ही चर्चाएं चल रही थीं क्योंकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहले ही इस संदर्भ में निर्देश दे चुके थे।
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मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में रेरा समेत अन्य राज्यों में पहले से ही मध्यस्थता फोरम चल रहे हैं और बाकायदा लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले वर्तमान व पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों को बतौर मध्यस्थ (कांसीलेटर) नियुक्त किया गया है। हरेरा मध्यस्थ फोरम के स्वरूप को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आ सकी है। हरेरा के मुताबिक, पंचनिर्णय, मध्यस्थता और सुलह जैसे वैकल्पिक विवाद समाधान (ऑल्टरनेट डिस्पयूट रेजोल्यूशन) मेकेनिज्म मुकदमेबाजी से कहीं अधिक निजी, किफायती और समय की बचत करने वाले हैं। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि हरेरा गुरुग्राम के सामने रियल एस्टेट डेवलपर्स और सेवा प्रदाताओं के साथ डीलिंग में घर खरीदारों में असंतोष के कई मामले आए हैं। इससे न केवल हरेरा अधिकारियों पर बल्कि सिविल न्यायालयों पर भी दबाव बढ़ गया है, जो पहले से ही बड़ी संख्या में लंबित मामलों से जूझ रहे हैं।
इस तरह से होगा कार्य
हरेरा ने मध्यस्थों का एक पैनल गठित किया है, जो रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े विवादों में मध्यस्थता करेगा। हरेरा गुरुग्राम द्वारा स्थापित मध्यस्थता मंच के दायरे में दो प्रकार के मामले आएंगे। पहली बार औपचारिक शिकायत दायर करने से पहले के चरण में मध्यस्थता की जाएगी और यह प्रक्रिया हरेरा गुरुग्राम की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दीपा मलिक द्वारा व्यक्तिगत आधार पर की जाएगी। वहीं दूसरी तरह के मामले प्राधिकरण द्वारा जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा हरेरा गुरुग्राम के एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर (एओ), एससी गोयल (सेवानिवृत्त) को सीपीसी की धारा-89 के प्रावधानों के संदर्भ में दी गई शिकायतों या मामलों के रूप में सामने आएंगे।
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