गुरुग्राम। दिल्ली एवं एनसीआर में ही नहीं, बल्कि राज्य के अधिकतर इलाकों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचने पर राज्य सरकार द्वारा शुक्रवार को देर शाम पटाखों की बिक्री एवं उनके जलाने पर प्रतिबंध लगाते ही शनिवार की सुबह जिले की पुलिस ने पटाखों के गोदाम बंद करा दिए। इस कारण जिले में पटाखों की बिक्री बंद हो गई। जिले में ग्रीन पटाखे बेचने के लिए 9 गोदामों को स्थायी लाइसेंस मिला हुआ है। इसी के साथ जिले में आठ स्थानों पर पटाखे जलाने संबंधी आदेश स्वयं निरस्त हो गया। इन गोदामों में ग्रीन पटाखों का काफी स्टॉक भरा हुआ है और सरकार के इस निर्णय से व्यापारियों में रोष है और उनको लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।
जिले में दिवाली के उपलक्ष्य में इन गोदामों पर ही लोग पटाखे खरीदने पहुंच रहे थे। दरअसल जिला प्रशासन ने अभी दुकानदारों को पटाखे बेचने के लिए परमिट नहीं दिया था। हालांकि 100 से अधिक दुकानदारों ने परमिट के लिए आवेदन कर रखा है। खास बात यह है कि इन दुकानदारों में से कई दुकानदारों ने पटाखे खरीद रखे हैं।
जिले के फर्रूखनगर, पटौदी, गाड़ौली आदि स्थानों पर पटाखों के गोदाम बंद कराने के लिए पुलिस सुबह ही पहुंच गई। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने गोदामों के संचालकों को बताया कि राज्य सरकार ने प्रदूषण का स्तर बढ़ने के मद्देनजर सभी प्रकार के पटाखे बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस कारण वह पटाखे नहीं बेच सकते हैं और अपने गोदाम बंद कर दें। पुलिस का फरमान सुनने के बाद संचालकों ने अपने गोदाम बंद कर दिए।
उधर राज्य सरकार के निर्णय से अनभिज्ञ लोग गोदामों पर पटाखे खरीदने के लिए पहुंचे, मगर उनको गोदाम बंद मिले। इस दौरान गोदामों के बाहर मौजूद संचालकों एवं उनके कर्मचारियों ने राज्य सरकार का आदेश बताया। इस तरह लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। दरअसल जिला प्रशासन ने दो दिन पहले दिवाली के दिन आठ स्थानों पर दो घंटे तक पटाखे जलाने की इजाजत दी थी। इस कारण लोग पटाखे खरीद रहे थे।
ग्रीन पटाखों से भरे हैं गोदाम
जिले में ग्रीन पटाखे बेचने की इजाजत थी। इस कारण गोदाम संचालकों ने भारी मात्रा में ग्रीन पटाखे खरीद रखे थे। उनके गोदाम पटाखों से गोदाम भर हुए हैं। दरअसल उनको दिवाली पर बड़ी मात्रा में पटाखे बिकने की उम्मीद थी, क्योंकि कोरोना महामारी के कारण शादियों के आयोजन में लोग पटाखे नहीं जला सके थे। मगर पटाखे बेचने पर प्रतिबंध लगने से उनको भारी घाटा होने के आसार हो गए हैं। एक ओर उनकी आय नहीं होगी, दूसरी ओर पटाखे खरीदने में उनके पास मौजूद राशि फंस गई।
लाइसेंस नवीनीकरण में खर्च होते हैं हजारों रुपये
पटाखे बेचने के लाइसेंस का नवीनीकरण कराने के लिए हर साल 15 से 20 हजार खर्च होते हैं। इसके अलावा फायर सिस्टम में एक सिलिंडर का नवीनीकरण कराने में 600 रुपये खर्च आता है। एक गोदाम में 10 से 15 फायर सिस्टम लगाने पड़ते हैं।
सरकार को राजस्व मिला पर हमारे रुपये फंसे : गोदाम संचालक
पटाखा गोदाम संचालक मनीष ने बताया कि उन्होंने करीब दो माह पहले लाखों के पटाखे खरीदे थे। उस समय जीएसटी भी देना पड़ा था। इस कारण सरकार को तो राजस्व मिल गया, लेकिन उनके रुपये फंस गए। सरकार को उनके नुकसान का ध्यान रखना चाहिए।
प्रदूषण बढ़ाने वाले मुख्य कारणों पर सरकार का ध्यान नहीं
गाडौली स्थित पटाखा गोदामों में हर साल लाखों के पटाखों की बिक्री होती है। यहां पर दिल्ली एनसीआर से भी लोग पटाखे खरीदने के लिए आते हैं। यहां पर शनिवार को दिल्ली से पटाखे लेने के लिए अमित और प्रेम आए, लेकिन गोदाम बंद होने के कारण वे पटाखे नहीं खरीद सके। उन्होंने निराश भाव में कहा कि प्रदूषण केवल दिवाली के पटाखों से ही नहीं होता। सरकार प्रदूषण का स्तर बढ़ाने वाले मुख्य कारणों की ओर ध्यान नहीं दे रही है।