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Gurugram News: अंसल ईडब्ल्यूएस मामले में एसटीपी रिकॉर्ड सहित अदालत में तलब

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-12 नवंबर को होनी है मामले की सुनवाई, एसटीपी फरीदाबाद को भी बुलाया
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-सुशांत लोक की आरडब्ल्यूए को मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट कोर्ट में देने को कहा

अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम। सेक्टर-57 स्थित अंसल के प्रोजेक्ट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आवंटित प्लॉटों के नाम पर हुए हजारों करोड़ रुपये के घोटाले में अदालत ने वरिष्ठ नगर योजनाकार (एसटीपी) को प्रोजेक्ट के रिकॉर्ड सहित हाजिर होने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होनी है। साथ ही सुशांत लोक की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के उपाध्यक्ष अमर जिंदल को मौके का निरीक्षण करके अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

वादी पक्ष से अधिवक्ता यतीश कुमार गोयल ने बताया कि गोपाल अंसल ने सेक्टर-57 स्थित सुशांत लोक-2 और और सुशांत लोक-3 में 500 एकड़ में एक कालोनी विकसित की थी। बिल्डर को दिए गए लाइसेंस की शर्तों के अनुसार बिल्डर को 20 फीसदी प्लॉट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लए अवांटित करना अनिवार्य है। यह प्लॉट 500 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से आवंटित होने चाहिए, लेकिन गोपाल अंसल ने ऐसा नहीं किया और जो प्लॉट ईडब्ल्यूएस के लिए थे उन्हें बेच कर करोड़ों रुपये के घोटाले को अंजाम दिया।
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अधिवक्ता यतीश कुमार गोयल ने बताया कि सुशांत लोक निवासी राजेंद्र कुमार गोयल ने इस संबंध में स्थानीय अदालत में मुकदमा दायर किया था। इसमें कहा गया कि बिल्डर पक्ष ने घोटाले से जुड़े दस्तावेज गायब कर दिए। तत्कालीन वरिष्ठ नगर योजनाकार संजीव मान ने कोर्ट में बयान दिया था कि सुशांत लोक–2 और 3 में ईडब्ल्यूएस के 931 प्लॉटस हैं, लेकिन मौके पर प्लॉटस मौजूद नहीं मिले। डीटीपीसी ने वरिष्ठ नगर योजनाकार फरीदाबाद को इस मामले की जांच सौंपी। एसटीपी फरीदाबाद और डीटीपीसी के बीच जो पत्राचार हुआ उससे यह खुलासा हुआ कि सुशांत लोक-2 और सुशांत लोक-3 के ईडब्ल्यूएस के प्लॉटों का रिकार्ड गायब है।
अब ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) सौरव शर्मा की अदालत ने सभी रिकॉर्ड तलब किए हैं। कोर्ट ने वरिष्ठ नगर योजनाकार फरीदाबाद देवेंद्र पाल और गुरुग्राम की वरिष्ठ नगर योजनाकार रेणुका सिंह से विवरण मांगा है कि संबंधित ईडब्ल्यूएस के कितने प्लॉट हैं। वह प्लॉट किसको आवंटित हुए हैं। किस प्लॉट का क्या नंबर है। इन सभी विवरण के साथ अदालत में हाजिर हों।
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यह बहुत बड़ा घोटाला है। इसमें कुछ विभागीय अधिकारी भी शामिल हैं। रिकॉर्ड भी गायब किए गए हैं। सरकार से मांग है कि इसमें मुकदमा दर्ज कर इसकी जांच सीबीआई को सौंपी जाए। - यतीश कुमार गोयल, अधिवक्ता, वादी पक्ष
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