- नूंह में खुले बूचड़खानों के खिलाफ उबाल
-सीएम तक की गई शिकायत, जल्द हो सकती है बड़ी कार्रवाई
मोहम्मद शाहिद मेवाती
तावड़ू। ज़िले में खुले में चल रहे बूचड़खानों और मीट फैक्ट्रियों के खिलाफ जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब यह मामला राज्य के मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने शिकायत में बूच़डखानों को आबादी क्षेत्र से दूर शिफ्ट करने और नई एनओसी जारी न करने की मांग की है। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन मीट फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी, बदबूदार हवा और खुले में फेंके जा रहे मांस के टुकड़े जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। खासतौर पर स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों में डर और घृणा का माहौल पैदा हो रहा है।
27 जुलाई को जब राज्यभर में सीईटी परीक्षा हो रही थी, उस समय गांव जलालपुर सीमा में एक मस्जिद के सामने खुले में मांस और गंदगी फेंकी गई। वहां से गुजर रहे छात्रों को बदबू से परेशानी होने लगी। खुले में फेंके गए वेस्ट मांस की घटना का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
रविवार को जलालपुर गांव में एक ट्रैक्टर मंडीखेड़ा की मीट फैक्ट्री का वेस्ट लेकर जा रहा था, मस्जिद के सामने मांस की गंदगी गिरा गया। इससे गांव में नाराजगी फैल गई। सरपंच अजीज ने तत्काल पंचायत बुलाई और निर्णय लिया कि कोई भी किसान मीट फैक्ट्री को खेत किराये पर नहीं देगा। जबकि मेवात हिंदू-मुस्लिम संगठन के स्टेट कोऑर्डिनेटर के नेतृत्व में हरियाणा सरकार के विभिन्न विभाग और अधिकारियों को शिकायत भेजी गई है। शिकायत में कहा गया है कि नई मीट फैक्ट्रियों को घनी आबादी से 30-50 किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाकों में शिफ्ट किया जाए। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को देखते हुए यह तत्कालीन कार्रवाई जरूरी है। नई एनओसी जारी करने पर तुरंत रोक लगाई जाए। संबंधित अफसरों व क्षेत्रीय विधायकों की बैठक बुलाकर अगस्त में ठोस निर्णय लिया जाए।
वहीं इनेलो नेता हबीब हवन नगर ने भी पूरे मामले को शुद्ध वातावरण वाले क्षेत्र के साथ साजिश बताते हुए कहा कि सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में एक बड़ी पंचायत बुलाकर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।