गुरुग्राम। नगर निगम में आए दिन भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। नगर निगम की इंजीनियरिंग विंग के अधीक्षण अभियंता सत्यवान पर एक बार फिर ठेकेदारों से छह फीसदी कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। इसी अधिकारी पर एक दिन पहले सदन की बैठक में भी निगम पार्षदों ने यह आरोप लगाए हैं। निगमायुक्त विनय प्रताप सिंह ने अब मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
दरअसल, ठेकेदारों ने निगमायुक्त से की शिकायत में बताया कि अधिकारी अपने कार्यालय में ठेकेदारों से कार्य अलॉट करने की एवज में तीन फीसदी से लेकर छह फीसदी तक के कमीशन की मांग करता है और कहता है कि वह शहरी स्थानीय निकाय में तीस लाख रुपये देकर आया है। वह रुपये भी तो पूरे करने हैं।
वहीं सोमवार को हुई सदन की बैठक में पार्षद धर्मबीर, ब्रह्म यादव और संजय प्रधान आदि ने भी निगमायुक्त व मेयर मधु आजाद से इसकी शिकायत की थी। मंगलवार को निगम के ठेकेदारों ने भी निगमायुक्त से इसकी लिखित में शिकायत की है।
अधीक्षण अभियंता सत्यवान पर भ्रष्टाचार का यह पहला आरोप नहीं है। इससे पहले भी अधिकारी की कई बार ज्यादा कमीशन मांगने के आरोप लग चुके हैं। वहीं शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने भी अधिकारी को गलत तरीके से पदोन्नति लेने के आरोप में नोटिस जारी किया हुआ है। बावजूद इसके भी अधिकारी को निगमायुक्त ने 50 लाख रुपये तक की वित्तीय शक्ति दी हुई है।
पार्षदों और ठेकेदारों ने अधिकारी पर कमीशन मांगने की शिकायत दी है। शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जाएगी।
- विनय प्रताप सिंह, निगमायुक्त, नगर निगम, गुरुग्राम।