- प्रदेश में सबसे अधिक ड्रॉप आउट मेवात जिले में, डीसी ने बैठक में ड्रॉप आउट को कम करने के दिए आदेश
शेरसिंह डागर
नूंह। मेवात में विद्यार्थियों के ड्रॉप आउट को रोकना शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। हालात यह हैं कि पांचवीं कक्षा तक जितने बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं उनमें से 10 प्रतिशत बच्चे ही 12वीं कक्षा तक पहुंच पाते हैं। हालांकि, उपायुक्त व जिला प्रशासन इसके लिए अभी से योजना बना रहे हैं। उपायुक्त ने इस संदर्भ में बैठक लेकर ड्रॉप आउट रेट को कम करने के लिए हिदायतें दी हैं ।
बता दें, कि नूंह जिले में 504 प्राइमरी, 256 मिडिल, 7 हाई तथा 134 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इनके अलावा 5 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 5 आरोही मॉडल स्कूल तथा 8 संस्कृति मॉडल स्कूल हैं। इन स्कूलों में पांचवीं कक्षा तक 1 लाख 45 हजार 141 छात्र स्कूल जा रहे हैं। आठवीं तक यह आंकड़ा घटकर 82 हजार 950 रह जाता है। दसवीं कक्षा में आंकड़ा करीब चार गुना घटकर 22 हजार 402 पर पहुंच जाता है। 12वीं कक्षा में केवल इनमें से 12 हजार 981 छात्र छात्रा ही पहुंच पाते हैं। नूंह में यह ड्राप आउट प्रदेश के अन्य जिलों से बहुत ज्यादा है। जिले की कुल साक्षरता दर लगभग 54 प्रतिशत है। जिसमें पुरुष साक्षरता दर लगभग 69 प्रतिशत है तो महिला साक्षरता दर 36 प्रतिशत है। यहां जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी से लेकर सैकड़ों अध्यापक व प्राध्यापकों के पद रिक्त हैं। अधिकारियों के पद खाली होने के कारण स्कूलों का निरीक्षण समय पर नहीं हो पता है। जिसके कारण अध्यापक अपने मनमर्जी से स्कूल आते हैं। जो अध्यापक दूसरे जिलों से आ रहे हैं वह शुक्रवार व शनिवार को दोपहर को ही स्कूल छोड़ देते हैं। ऐसे में स्कूलों की स्थिति खराब हो रही है।
बेटियां छोड़ देती हैं स्कूल :
संसाधनों की कमी के कारण आज भी करीब 54 प्रतिशत बेटियां पांचवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ देती हैं। यह आंकड़ा प्रदेश में सबसे अधिक है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का आंकड़ा यहां सही साबित नहीं हो रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट में भी यहां ड्रॉपआउट की समस्या को दिखाया गया था। अधिकांश मां-बाप कम साक्षर हैं। वह बेटा बेटियों को पढ़ाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। जो लोग ध्यान दे रहे हैं संसाधनों की कमी उसमें आड़े आती रही है।
हमारी कोशिश है कि ड्रापआउट रेट को रोका जाए। इसके लिए नए सत्र में पूरी कोशिश होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक ली जा रही है। इसके अलावा इलाके के प्रमुख लोगों की भी मदद ली जाएगी। अध्यापक व आम आदमी इसमें अपना दायित्व निभाएं। -विश्राम मीणा, डीसी नूंह।