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Gurugram News: 65 दिन बाद अग्निवीर का पार्थिव शरीर पहुंचा कुर्थला

Sat, 11 Oct 2025 11:19 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
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बादल फटने से पांच अगस्त को उत्तराखंड के हर्षिल कैंप से लापता हुआ था अग्निवीर समय सिंह
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दिनेश देशवाल
नूंह। उत्तराखंड के हर्षिल कैंप में बादल फटने से पांच अगस्त 2025 को गुम हुए अग्निवीर सिपाही समय सिंह का पार्थिव शरीर करीब 65 दिन बाद शनिवार को उसके पैतृक गांव कुर्थला पहुंचा। जैसे ही समय सिंह के पार्थिव शरीर की नूंह पहुंचने की सूचना मिली तो बड़ी संख्या में युवा मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ नूंह व छछेड़ा बस अड्डे पर पहुंचे। वहां से डीजे पर बजते देशभक्ति गीतों के साथ हाथों में तिरंगा लिए युवाओं का काफिला भारत माता की जय बोलते हुए वीर सैनिक के पार्थिव शरीर के साथ कुर्थला गांव पहुंचा।
पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार की परंपरा को पूरा करते हुए चंद मिनटों के लिए परिवार के बीच घर ले जाया गया। वहां से पार्थिव शरीर को शहीद किरण शेखावत पार्क में ले जाया गया। यहां पर परिवार जनों व क्षेत्र के लोगों द्वारा वीर सैनिक को अंतिम विदाई के रूप में पुष्पांजलि अर्पित की गई। पूर्व सैनिक पिता ने अपने इकलौते पुत्र को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की परंपरा पूरी की।
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बता दें कि जिले के कुर्थला गांव का 20 वर्षीय समय सिंह सेना की राजपूताना राइफल्स की यूनिट-14 में अग्निवीर के रूप में भर्ती हुआ था। समय सिंह के पिता दलबीर भी भारतीय सेना से सेवानिवृत है तथा परिवार में माता-पिता के अलावा समय सिंह से बड़ी दो बहनें हैं, जो शादीशुदा है। दोनों बहनों और समय सिंह की आयु में भी काफी अंतर है, परिवार के कई सदस्य सेना में होने के चलते परिवार ने उसे भी देश की सेवा के लिए सेना में भेज दिया। उनकी यूनिट उत्तराखंड के हर्षिल कैंप में थी कि तभी पांच अगस्त को वहां बादल फट गया, जिसमें 12 अग्निवीर बह गए। इन्हीं में समय सिंह भी शामिल था। आठ अगस्त को परिजनों को गुम होने की सूचना मिली। सैनिकों के लंबे समय तक न मिलने तथा अनहोनी की आशंका के चलते सेना ने गुम हुए सैनिकों के माता-पिता का देहरादून बुलाकर डीएनए सैंपल लेकर टेस्ट करवा लिया था। सेना ने लगातार गुम हुए सैनिकों की तलाश जारी रखी और 19 सितंबर को एक कंकाल मिला। जिसकी डीएनए जांच करवाई गई। 9 अक्तूबर को इस कंकाल का डीएनए समय सिंह के माता-पिता के डीएनए से मिल गया तो सेना ने कुर्थला में उसके पिता को सूचना दी कि समय सिंह का पार्थिव शरीर मिल गया है। इसके बाद अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 10 अक्तूबर को पार्थिव शरीर कुर्थला गांव के लिए रवाना हुआ और शनिवार को सुबह 10 बजे नूंह पहुंचा।
पिता ने अग्निवीर योजना पर उठाया सवाल
शहीद समय सिंह के पिता पूर्व सैनिक दलबीर सिंह ने रोते हुए कहा कि उसका बेटा मां-भारती की सेवा के लिए सबसे बड़ा बलिदान देकर गया है, जिसका उनके पूरे परिवार को गर्व है। उसके बेटे ने जिद करके सेना में जाने का फैसला किया था, हालांकि पॉलिटेक्निक की पढ़ाई करते हुए उसका एक साल पूरा हो गया था, लेकिन उसकी जिद थी कि वह एक बार सेना की वर्दी जरूर पहनेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना में मात्र छह माह की ट्रेनिंग जवान को दी जाती है, जो नाकाफी रहती है। सरकार इस योजना को समाप्त करे, ताकि इस प्रकार से किसी अन्य मां-बाप का चिराग न बुझे।
किसकी कलाई पर बांधेंगीं राखी
समय सिंह की दोनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। उनकी नम आंखों में एक ही सवाल था कि वे अब किसकी कलाई पर राखी बांधेंगी। जितना लंबा इंतजार करवाकर समय सिंह उनके भाई के रूप में पैदा हुआ था, उसी तरह जल्दी वह उन्हें छोड़कर चला गया। इकलौते भाई के चले जाने के दर्द को दिल में लिए दोनों बहनों ने सैल्यूट कर अपने वीर भाई को अंतिम विदाई दी तो मौके पर मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया।
लोगों ने दी अंतिम विदाई
अग्निवीर की अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर मुकेश वशिष्ठ, नूंह से विधायक आफताब अहमद, इनेलो जिलाध्यक्ष ताहिर हुसैन, पूर्व मंत्री संजय सिंह के भाई एवं भाजपा नेता अरुण सिंह, डीएसपी मुख्यालय हरिंद्र सिंह के अलावा, भाजपा जिला महामंत्री रमेश मानूवास, हेमराज शर्मा समेत क्षेत्र के राजनीतिक व सामाजिक रूप से प्रमुख लोग शामिल हुए।
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नहीं पहुंचा कोई प्रशासनिक अधिकारी
समय सिंह ने देश के लिए बलिदान दिया, लेकिन जिला प्रशासन की तरफ से उसके अंतिम संस्कार में एक भी अधिकारी के न पहुंचने से लोगों में चर्चा रही कि जिला उपायुक्त को सैनिक के सम्मान में यहां पहुंचना चाहिए था।
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