गुरुग्राम। लगता है साइबर सिटी की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता इस सत्र में छात्रों को रिझा नहीं पाई है। एक ओर जहां एक सीट पर 10 से 15 आवेदन पहुंचते थे और छात्र-छात्राओं में दाखिलों के लिए जद्दोजहद बनी रहती थी, वहीं इस बार विद्यार्थी दाखिलों में कोई रुचि नहीं दिखा रहे। स्थिति यह है कि आठवें चरण की दाखिला प्रक्रिया के बाद भी राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और राजकीय महाविद्यालयों में सौ से ज्यादा सीटें रिक्त पड़ी हैं।
उच्च शिक्षा निदेशालय ने 7 सितंबर से दाखिला प्रक्रिया शुरू की। अक्तूबर तक 2 मेरिट सूची जारी होने के बाद भी सीटें पूरी नहीं हो सकी। सीटें भरने के लिए कॉलेजों में फिजिकल काउंसलिंग कराई गई। 5 जनवरी तक सात बार प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। बावजूद इसके एससी-डीएसटी वर्ग में सीटें अभी भी रिक्त हैं। वहीं, चार चरणों में पीजी कोर्स के तहत 11 जनवरी तक दाखिला प्रक्रिया चली। इसके बाद भी 66 सीटें रिक्त हैं।
आईटीआई संस्थानों में भी 76 सीटें रिक्त
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में भी 7 सितंबर से दाखिले शुरू किए गए थे। पांच चरणों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 50 फीसदी सीटें खाली रहीं। ऐसे में निदेशालय ने सीटें पूरी करने के लिए सीधा दाखिला (ऑन द स्पॉट) प्रक्रिया को शुरू किया। बावजूद इसके 76 सीटें रिक्त हैं। दाखिला प्रक्रिया 16 जनवरी को पूरी हो चुकी है।
पहली बार दाखिला प्रक्रिया इतने लंबे वक्त तक जारी रही है। हालांकि, जिन छात्रों को दाखिला लेना था वे छात्र प्रारंभिक प्रक्रिया में ही दाखिला ले चुके थे। सीटें अभी भी रिक्त हैं। अब दाखिला प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ानी चाहिए।
- विनोद खनगवाल, प्राचार्य आईटीआई सोहना।
दाखिला प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या नहीं, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। यूजी और पीजी कोर्सों में अभी भी सीटें रिक्त हैं। कई बार प्रक्रिया को बढ़ाया गया है। अधिकतर सीटें एससी और डीएससी कैटेगरी की हैं। अब नियमित तौर पर कक्षाएं शुरू कर सत्र को पूरा करना चाहिए।
- वीरेंद्र अंतिल, प्राचार्य, द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय।