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Gurugram News: आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद बंद हुआ बड़ा बूचड़खाना

Tue, 21 Oct 2025 11:07 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
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क्षेत्र के किसानों सहित सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों ने ली राहत की सांस
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संवाद न्यूज़ एजेंसी

फिरोजपुर झिरका। मेवात में चल रहे बूचड़खानों को लेकर लोग बड़े परेशान हैं। इन बूचड़खानों को लेकर क्षेत्र के लोग जगह-जगह लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, कुछ दिन पूर्व मांडीखेड़ा स्थित अल नवेद एग्रो फूड एक्सपोर्ट बूचड़खाने पर आयकर विभाग की कड़ी कार्रवाई के बाद इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इससे क्षेत्र के किसानों सहित मेवात संघर्ष समिति और सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों सामाजिक संगठन ने राहत सांस ली है।
सूत्रों के अनुसार छापे के पहले ही दिन यानी 13 अक्तूबर को पशु बूचड़खाने में लाए गए और उनको काटा गया था। उसके बाद से बूचड़खाने में कटाई का काम बंद है और अब सफाई का काम चल रहा है। परिसर और आसपास के इलाकों में जमा खून व गंदे पानी के तालाबों को मशीनों से साफ किया जा रहा है। बूचड़खाने के कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां 13 से 15 अक्तूबर तक चली जांच में आयकर को घोटाले के पुख्ता सबूत मिले हैं, हालांकि इस संबंध में न तो प्रशासन और न ही बूचड़खाने के अधिकारियों ने कोई आधिकारिक पुष्टि की है। आयकर टीम ने कई दस्तावेज और कंप्यूटर रिकार्ड अपने कब्जे में लिए हैं, जिनकी जांच जारी है। इस बूचड़खाने के बंद होने से आसपास के लगभग 30 गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। क्षेत्र के किसान नोमान, अनवर, अजहरुद्दीन, सफी मोहम्मद आदि का कहना है कि बूचड़खाने से निकलने वाली गंदगी फसलों को भारी नुकसान करती है। बूचड़खानों की वजह से उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर भूमि में तब्दील हो रही है। आने वाला समय में किसान क्षेत्र में एक-एक दाने को पैदा करने के लिए तरस जाएंगे। यह बूचड़खाने बंद नहीं हुए तो क्षेत्र के किसानों का अस्तित्व मिट जाएगा। का कहना है कि बूचड़खाने से निकलने वाला खून और गंदा पानी कई सालों से उनकी जिंदगी को जहरीला बना रहा था। गांवों में दमा, त्वचा रोग और कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही थीं।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि क्षेत्र के अन्य दो बूचड़खाने भी बंद हो जाएं तो लोगों को इन खतरनाक बीमारियों से पूरी तरह निजात मिल सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस क्षेत्र में संचालित सभी बूचड़खानों की जांच की जाए, ताकि क्षेत्र को प्रदूषण और बीमारियों से पूरी तरह मुक्त कराया जा सके।
क्या कहते है ग्रामीण

बूचड़खाने से निकलने वाली गंध, खून, मल केमिकल से किसानों की फसल खराब हो रही हैं। जब से बूचड़खाने खुले हैं किसानों की फसल को नुकसान ही नुकसान हुआ है आगे भी होता रहेगा जिला प्रशासन को इस पर तुरत करवाई करनी चाहिए।
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मोहम्मद उस्मान, सामाजिक कार्यकर्ता गुजर नंगला

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बूचड़खाने से शरीर में अनेक प्रकार की बीमारी हो रही है और पर्यावरण दूषित हो रहा है जिसे सांस लेने में परेशानी हो रही है। जिला प्रशासन को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
नियामत खान, किसान, गूजर नंगला
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