गुरुग्राम। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने अर्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर के गुरुग्राम में आठ साल से लंबित 600 फ्लैट को बनाने की जिम्मेदारी अल्फाकॉर्प को सौंप दी है। यह फ्लैट द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास 2013 में बनने शुरू हुए थे, जिनको पांच साल में यानी कि 2018 में बनाया जाना था। लेकिन अर्थ इन्फ्रास्ट्रक्टचर निर्धारित समय तक नहीं बना सका। जबकि समय से किस्त लेता रहा। इस मामले में खरीदारों ने प्रदेश सरकार, हरेरा तथा अन्य अथॉरिटी में 2018 से ही शिकायतें की। कई स्तर पर मामला चला, सुनवाई हुई, दोनों पक्षों को सुनने के बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की ओर से यह आदेश जारी किए गए हैं। इसी तरह के नोएडा के दो अन्य मामलों में भी ट्रिब्यूनल की ओर से आदेश जारी किए गए हैं।
ट्ब्यिूनल ने यह आदेश रियल एस्टेट डेवलपर समाधान योजना के अंतर्गत जारी किए हैं। इसी के बाद गुरुग्राम स्थित 600 फ्लैट का निर्माण कराने के लिए अल्फाकॉर्प 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसी के आधार पर अगस्त से निर्माण शुरू होने की पूरी उम्मीद है। एनसीएलटी के आदेश के अनुसार खरीदारों की शिकायतों के आधार पर अर्थ इन्फ्रास्ट्रक्टर की दिवाला प्रक्रिया जून 2018 में शुरू हुई थी। अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की गुरुग्राम, नोएडा सहित पांच अटकी परियोजनाओं पर एक साथ सुनवाई थी। एनसीएलटी ने बिडर्स को कंपनी के लिए एक योजना प्रस्तुत करने के बजाय प्रत्येक परियोजना के लिए अलग-अलग समाधान योजना प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी। उसी के अंतर्गत गुरुग्राम की 600 फ्लैट वाले इस प्रोजेक्ट को टेकओवर किया गया है।
10 अटकी योजनाओं को टेकओवर किया
अल्फाकॉर्प के सीएफओ संतोष अग्रवाल का कहना है कि गुरुग्राम सहित 10 अटकी परियोजनाओं को टेकओवर किया गया है जिसमें यह जानकारी ले ली गई है कि आवंटियों से अर्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर ने अब तक कितनी राशि ली है। भविष्य में कितनी राशि ली जानी है। अधूरे फ्लैट तो पांच साल तक तैयार करने की योजना है। हो सकता है कि समय से पहले पूरे हो जाएं या फिर कुछ और समय लग सकता है।
इनका कहना है कि फ्लैट खरीदार अपनी मेहनत की कमाई को आवासीय परियोजनाओं में निवेश करते हैं। उनके हितों की सुरक्षा हमारे लिए महत्वपूर्ण है। रुकी हुई परियोजनाओं ने हमेशा इस क्षेत्र की प्रगति में बाधा का काम किया है। इसलिए इसमें कदम रखते हुए हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि निवेशकों और खरीदार का विश्वास बना रहे।