नगीना थाना क्षेत्र के गांव गन्डुरी का मामला, दुकान से चमचम खरीदकर लाया था
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नगीना थाना क्षेत्र के गांव गन्डुरी में शनिवार सुबह मिठाई खाने के बाद 8 मासूम बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने सभी बच्चों को जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने पांच बच्चों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें नल्हड़ अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उनका इलाज जारी है।
जानकारी के मुताबिक, गांव निवासी असलम शुक्रवार देर रात बड़कली चौक स्थित एक मिष्ठान भंडार से चमचम मिठाई खरीदकर घर लाया था। उस समय बच्चे सो चुके थे। शनिवार सुबह बच्चों के जागने पर उनकी मां रजीना ने वही मिठाई खाने को दे दी। मिठाई खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी और उनके मुंह से झाग निकलने लगे, जिससे परिवार में हड़कंप मच गया। इस घटना में सोफेद (16), अजूबा (15), सोफिया (10), सनोफिया (8), जुड़वा समर व सनम (4), समरीन (2) और रूहान (5) की तबीयत खराब हुई। इनमें से दो बच्चों सोफेद और सनोफिया की हालत में सुधार बताया जा रहा है, जबकि बाकी छह बच्चों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सभी बच्चों को पहले मांडीखेड़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद पांच बच्चों को नल्हड़ अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों में फूड पॉइजनिंग जैसे लक्षण पाए गए हैं। खासकर समर की हालत चिंताजनक बनी हुई है, जिसे लगातार निगरानी में रखा गया है। सभी बच्चों की मेडिकल लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) तैयार कर ली गई है। हालांकि, अब तक परिजनों की ओर से पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। नगीना थाना प्रभारी सचिन ने बताया कि मामला संज्ञान में है और शिकायत मिलने पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मिष्ठान दुकानों की जांच की मांग की
मेवात इलाके में मिलावटी मिठाइयों का खेल जोर-शोर से पिछले कई वर्षों से चलता रहा है, जिससे जिले में त्योहारों पर चर्चाओं का बाजार गर्म रहता है। विभाग की टीम कार्रवाई तो करती है लेकिन उस कार्रवाई का असर ज्यादा देर तक दिखाई नहीं देता। मिठाई खाने से अचानक बिगड़ी 8 मासूमों की हालत ने विभाग व मिष्ठान संचालकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या मिठाई खराब थी या उसमें मिलावट थी, यह जांच का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मिष्ठान दुकानों की जांच की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। वहीं जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी रमेश चौहान से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाए।
फोटो - इलाज के दौरान बेड पर लेते बच्चे।
-बच्चों के पास बैठी परिवार की महिलाएं।