नगर निगम क्षेत्र में 55 भवन चिन्हित हुए थे, केवल छह ही टूटे, 49 बाकी
न्यूमेरिक्स
: 100 साल से पुरानी इमारतें बन चुकी हैं खंडहर
: 2019-20 में किया गया था जर्जर भवन का सर्वे
: 55 जर्जर भवन तय किए गए थे।
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शहर में 49 जर्जर भवन बारिश के बीच लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन चुके हैं। सोमवार से जारी बारिश में यह जर्जर इमारतें कभी भी गिर सकती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकती हैं। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इन जर्जर भवनों को तोड़ने के आदेश दिए हैं, लेकिन केवल छह भवन ही गिराए गए हैं। गुरुग्राम, कादरपुर और वजीराबाद में कार्रवाई के बाद नगर निगम के बुलडोजर वर्कशॉप में ही कार्रवाई के इंतजार में खड़े हैं।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग के आदेश पर जर्जर इमारतों को लेकर वर्ष 2019-20 में नगर निगम ने एक सर्वे करवाया था। याशी कंसलटेंसी एजेंसी से करवाए गए सर्वे में कुल 183 बिल्डिंग कंडम पाई गई थीं। निगम ने फिर अपनी टीम से सर्वे कराया तो 55 इमारतों को खतरनाक माना। छह साल के बाद अब नगर निगम ने कार्रवाई शुरू की, लेकिन 55 में से 49 भवन अब भी मौजूद हैं।
नगर निगम के एसडीओ का कहना है कि चिह्नित की गई सभी इमारतों को का सर्वे किया गया था। जर्जर इमारतें ज्यादा पुराने गुरुग्राम में स्थित हैं। इनमें जैकबपुरा और सदर बाजार, बर्फखाना सहित अन्य कालोनियों में ऐसी जर्जर इमारतों को चिह्नित किया जा चुका है। इसके अलावा कन्हैई, वजीराबाद, प्रेमपुरी आदि जगहों पर सौ साल से भी पुरानी इमारतें बनी हैं। गांव झाड़सा में आठ जर्जर इमारतें हैं।
वर्जन
नगर निगम क्षेत्र के पुराने भवनों का सर्वे किया जा चुका है। निगम की ओर से उन्हें गिराने का भी काम किया जा रहा है। लोगों से अपील की है कि कंडम भवन के आस-पास से बचे और सहयोग करें। - प्रदीप दहिया , आयुक्त नगर निगम, गुरुग्राम।