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39 गांवों की पंचायत, निगम में शामिल करने का विरोध

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गुरुग्राम। नए 39 गांवों को नगर निगम में शामिल करने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। इन गांवों के लोग संपत्ति कर लगाने और भवन उपनियम लागू करने का विरोध कर रहे है। इन गांवों के लोग खिलाफत के लिए बड़ी तैयारी में जुट गए हैं। इसी क्रम में रविवार को वजीराबाद गांव में पंचायत की गई। इस दौरान इन गांवों को नगर निगम में शामिल करने का कड़ा विरोध किया गया। बीरू संरपंच, तिलक राज चौहान, संजय भोंडसी, सुंदरलाल यादव, प्रेमपाल कासन आदि ने इसके खिलाफ आंदोलन चलाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों को एकजुट करने के लिए 21 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी के बैनर तले 39 गांवों के ग्रामीण अपनी मांग के संबंध में 24 सितंबर को उपायुक्त को ज्ञापन देंगे।
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पंचायत में कहा गया कि नगर निगम के गठन के दौरान उसमें 38 गांवों को शामिल किया गया था। इन गांवों के निवासियों की संपत्तियों पर नगर निगम ने हाल ही में संपत्ति कर लागू कर दिया है। इसके अलावा भवन उपनियम लागू कर दिए गए हैं। नगर निगम के इस निर्णय का संबंधित गांवों के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। इसी बीच, नगर निगम ने इलाके के 39 गांवों को अपने अधीन लेने का निर्णय लिया है। पहले से निगम में शामिल गांवों की हालत देखकर इन 39 गांवों के लोग हरकत में आ गए हैं। वे अपने गांवों को नगर निगम में शामिल करने के विरोध में जुट गए हैं।
पंचायत में ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि नगर निगम में उनके गांव शामिल हुए तो वे बर्बाद हो जाएंगे। पहले से निगम में शामिल गांव स्लम में बदलने लगे हैं। निगम के अधीन इन गांवों में एक भी विकास कार्य नहीं हुआ है। उन गांवों की करोड़ों रुपये कीमत की भूमि और पंचायत के पास जमा करोड़ों रुपये नगर निगम के पास चले गए। अब नगर निगम उन गांवों के लोगों पर संपत्ति कर एवं भवन उपनियम जैसे निर्णय थोप रहा है। इसी तरह, उनके गांवों की जमीन व पंचायत के पास जमा राशि नगर निगम के पास चली जाएगी। इसके अलावा, गांवों को सरकार से अनुदान मिलना भी बंद हो जाएगा। उनके ऊपर भी संपत्ति कर और भवन उपनियम लागू होंगे। इस कारण वे नहीं चाहते कि उनके गांवों को नगर निगम में शामिल किया जाए।
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