एनजीटी के आदेश पर अंसल बिल्डर से सीपीसीबी वसूलेगा जुर्माना
-सुशांतलोक क्षेत्र के निर्माण के दौरान पर्यावरण नुकसान के मामले में हुआ आदेश
-प्रोजेक्ट पर चल रहे कामों पर लगाई गई रोक
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुशांत लोक क्षेत्र के निर्माण में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर के्रदीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को अंसल बिल्डर से जुर्माना वसूलने के आदेश दिए हैं। साथ ही एनजीटी ने बिल्डर के प्रोजेक्ट पर चल रहे कार्यों को भी बंद करवाने को कहा है। सीपीसीबी ने सुशांतलोक का निरीक्षण करने के बाद रिपोर्ट सौंपी थी, इसके बाद एनजीटी ने 8 जनवरी 2019 को यह आदेश जारी किए हैं।
अंसल बिल्डर ने करीब 600 एकड़ में सुशांत लोक फेज-1 का निर्माण किया गया था। नियम अनुसार कॉलोनी के निर्माण के समय 45 फीसदी क्षेत्र ओपन स्पेस, पार्क, रोड इत्यादि के लिए छोड़ना अनिवार्य है। आरोप है कि बिल्डर ने नियमों को ताक पर रख ऐसा नहीं किया। ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण कर दिया गया। इसके अलावा बिल्डर ने निर्माण के लिए पर्यावरण मंजूरी भी नहीं ली। सोसाइटी में धड़ल्ले से भूजल दोहन चल रहा है। जिसके खिलाफ स्थानीय लोगों ने नजीटी में याचिका दायर की थी। इसपर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने सीपीसीबी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए थे। टीम में जिला नगर योजनाकार विभाग हरियाणा, दिल्ली स्कूल ऑफ प्लानिंग एवं कृषि, केंद्रीय भूमि जल बोर्ड और सहित पर्यावरण प्रभाव आंकलन बोर्ड के सदस्य शामिल थे।
नवंबर 2018 में एनजीटी में सौंपी गई रिपोर्ट में कमेटी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान शिकायत सही पाई गई। बिल्डर ने पर्यावरण मंजूरी लिए बिना ही सोसाइटी का निर्माण किया है। ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण करने के साथ ही केंद्रीय भूमि जल बोर्ड से अनुमति लिए बिना ही भूजल दोहन किया जा रहा है। घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं बने हैं। क्षेत्र के सीवरों को बरसाती नालों से मिलाया गया है। वहीं जनरेटर का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।
सीपीसी की इस रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने सीपीसीबी को अंसल बिल्डर से पर्यावरण को पहुंचाए गए नुकसान का जुर्माना वसूलने और बिल्डर के प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। वहीं इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील सतीश गोयल ने कहा कि बिल्डर ने ये सब जिला नगर योजनाकार विभाग के अधिकारियों से सांठ-गांठ कर किया है। उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।