विश्व स्तनपान सप्ताह::
50 फीसदी बच्चों को ही मिल पाता है मां का दूध
-मां का दूध नवजात के लिए पहला टीका
-पॉश सोसायटी की महिलाएं भी स्तनपान के प्रति हो रही जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मां का दूध बच्चे के लिए वरदान होता है। जन्म के एक घंटे के भीतर मां द्वारा बच्चे को करवाए जाने वाला स्तनपान बच्चे को लगने वाले पहले टीके के तौर पर काम करता है। इससे शिशु मृत्यु दर पर भी काबू पाया जा सकता है, लेकिन इन सबके बावजूद 50 फीसदी बच्चों को मां का दूध नसीब नहीं हो पाता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 4 (एनएफएचएस-2016) के अनुसार राज्य में रहने वाले 6 माह से कम उम्र के सिर्फ 50.3 फीसदी बच्चों को ही स्तनपान का अवसर मिलता है। हालांकि यह आंकडा पिछले सर्वे यानी एनएफएचएस-3 के मुकाबले बेहतर है। 2005-2006 के सर्वे के मुकाबले इस बार के सर्वे में 17 फीसदी का सुधार दर्ज किया गया है। डॉक्टरों की मानें तो अब पॉश सोसायटी की महिलाएं भी स्तनपान के प्रति जागरूक हो रही हैं।
साइबर सिटी में बुधवार से विश्व स्तनपान सप्ताह का आगाज किया गया। इस अवसर पर जिले के नागरिक अस्पतालों सहित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी अभियान चलाया जा रहा है। वहां आने वाली गर्भवती व अन्य महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उप-सिविल सर्जन डॉ. नीलम थापर ने बताया कि मां का दूध बच्चे के लिए अमृत है। यदि शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर ही स्तनपान करवा दिया जाए तो इससे शिशु व महिलाओं में कैंसर होने का खतरा भी कम रहता है। अक्सर जानकारी के अभाव में मां अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करती है, जिसके कारण वह सही पैष्टिकता देने के लिए बच्चे को बोतल से दूध पिलाना ज्यादा बेहतर समझती हैं, लेकिन असलियत में स्तनपान ही शिशु के लिए लाभदायक है। इसके लिए सरकार की ‘मां का पूर्ण स्नेह’ योजना के तहत माताओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जा रहा। ताकि मां और शिशु दोनों सुरक्षित रह सकें।
वहीं कॉलंबिया एशिया के नोनटोलॉजिस्ट डॉ. सचिन जैन का कहना है कि मां का दूध सिर्फ शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि उनके सेंसरी और संज्ञानात्मक विकास को भी बढ़ावा देता है। नवजात के स्वास्थ्य के विकास के लिए यह आदर्श भोजन है, जिसकी तुलना किसी भी फॉर्मुला या सब्सटिट्यूट से नहीं हो सकती है। मां को बच्चे को 2 साल की उम्र तक स्तनपान कराना चाहिए। पारस अस्पताल की यूनिट हेड ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकॉलजिस्ट डॉ. नूपुर गुप्ता का कहना है कि मां का दूध विटामिन ए, बी1, बी2, बी6, बी12, सी, डी और ई का भी प्रमुख स्रोत होता है।