डाक कांवड़ लाने का बढ़ रहा रुझान
गुरुग्राम। इस बार कांवड़ लाने वाले शिवभक्तों में डाक कांवड़ का क्रेज युवाओं के सिर चढ़ कर बोल रहा है। शिव भक्त साधारण कांवड़ लाने की बजाए डाक कांवड़ में लाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। पिछले साल डाक कांवड़ लाने वालों की संख्या 2500 थी मगर इस बार 5 हजार के करीब युवा डाक कांवड़ लाने के लिए तैयारी कर रहे हैं।
साइबर सिटी में डाक कांवड़ लाने वालों ने डाक कांवड़ के कई संघ बनाए हुए हैं। डाक कांवड़ लाने के लिए पहले संघ के प्रधान को अपना नाम रजिस्टर करवाया जा रहा है। पांचवीं बार डाक कांवड़ ला रहे डीएसपी सुरेंद्र शर्मा, राजबीर कुल्हडिया व सुनील शर्मा ने बताया कि वह पांचवीं बार डाक कांवड़ लाने की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस बार साइबर सिटी के युवा साधारण कांवड़ की बजाए डाक कांवड़ लाने के लिए अपना नाम रजिस्टर करवा रहे हैं। डाक कांवड़ लाने वालों में 20 से 30 साल के युवा भाग ले रहे हैं।
इस बार नहीं ले जाएंगे डीजे...
डाक कांवड़ लाने वाले राजबीर कुल्हडिया व सुरेद्र शर्मा ने बताया कि इस बार कांवड़ियों का डीजे से परहेज रहेगा। डीजे के कारण ध्वनि प्रदूषण ज्यादा होता है। अगर कोई घटना भी हो जाती है तो डीजे की तेज आवाज के कारण पता नहीं चल पाता।
डाक कांवड़ लाने के होते है अलग कायदे कानून
क्या है डाक कांवड़
पंडित अमरचंद भारद्वाज ने बताया कि डाक कांवड लाने का मतलब है कि गंगा से जैसे ही जिस स्थिति में जल मटकी में डाला जाता है उसी के साथ कांवड़ चलनी शुरू हो जाती है। जब तक वह जल शिवलिंग को समर्पित ना हो तब तक वो कांवड़ रूकती नहीं है।
उन्होंने इसके महत्व के बारे में बताया कि वैसे तो कांवड़ चार प्रकार की होती है लेकिन डांक कांवड़ लाने के बारे में मान्यता है कि इससे भोले बाबा प्रसन्न होते हैं। अपनी मनोकामना जल्दी पूरी कराने के लिए युवाओं में डाक कांवड़ लाने का रुझान बढ़ रहा है।
डाक कांवड़ लाने के नियम
1. कांवड़ उठाने के बाद कांवड़ियों को पीछे मुड़कर नहीं देखना होता है
2. डाक कांवड़ चलने के बाद कांवड़ रूकनी नहीं चाहिए।
3.जिस रास्ते से गुजर चुके उस से दुबारा नहीं गुजर सकते।
4. कांवड़ को गुलर के पेड़ के नीचे से नही निकालना होता है। अगर इस पेड़ के नीचे से कांवड़ गुजर गई तो इसे खंडित माना जाएगा।
5. समय बोलकर जाने वाले डाक कांवड़िए को बोले गए समय पर कांवड़ को चढ़ाना होता है।
6. डाक कांवड़ लाने वाले सभी भक्त कांवड़ उठाने से लेकर कांवड़ चढ़ाने तक उपवास रखते हैं।